सांख्यकारिका | Sankhyakarika

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Sankhyakarika  by श्री ईश्वरकृष्ण - Shri Isvarakrsna

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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मौडपादभाण्यस हिता साख्यिकारिका आाष्यमाव्णिनों संस्कत-हिन्दी-व्याख्योपेता ६6 दुःखत्रयाभि घाताज्जिज्ञाता तदभिघातके हेतो । दृष्टे सापार्था चेन्तेकास्तात्यन्ततो5मावातू ॥ १ ॥ ७ गौडपादभाष्यम्‌ 6 कपिलाय नमस्तरुम येनाविद्योदधी जगति मग्ने । काशुण्याद्‌ सांख्यमयी नौरिव विहिता प्रतरणाय ॥ १ ॥ अत्पग्रस्प॑ स्पष्ट. प्रमाणसिंद्धान्तहेतुभिर्युक्तमुर । शास्त्र शिप्यपहिताय.. समासतोण्हें प्रवक्ष्पामि ॥ २ ॥ दुःखन्नयेति । अस्था ८ मार्याया उपोद्वात क्रियते । इद भगवान्‌ कहा- सुत्त कपिलो नाम ततु यथा-- हू सनकश्च सनन्दश्च ठृतीयरच सनातन ।- आसुरि कपिलश्चैंच वोदु पश्चशिखस्तथा 1 इत्येति ब्रह्मण पुा सप्त प्रोप्ता महूर्पय ॥ १. सत्वरजस्तमो भिस्विगुणै प्रतायमानेज्मुष्मिन्मायाप्रअब्वे निमज्जतां प्राणिनामुद्धरणार्थ संख्या प्रकुबंते चेद॑ प्रकृति च॒ भचक्षते । चतुर्षिशतितत्त्वासि लेप सांख्या प्रकीतिता ॥ इत्यायुक्तदिशाउन्वर्यसंज्ञा सांख्यदर्शनात्मिका नौरिव चेन महर्पिणा विनिमिता तस्मै नम इति भाव 1 २. दुष्टादीनि प्रमाणानिं संत्का्य॑वादा दिरूपा साख्यसिद्धान्ता अचव्यक्ता- दिप्रमे यसाघकहेतवश्च तैयु क्तमित्यर्थ | ३ प्राहंज़िकं पीठमारब्यत इत्य




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