ब्रह्म योग विद्या | Bramha Vidya

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Bramha Vidya  by बाबू ब्रजमोहन लाल वर्म्मा - Babu Brajmohan Lal Varmma

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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(७ 'खरोदय' शसेरके सम्बन्धमें शारोरिक साइन्स है, भौर अध्याक-विपयरम आध्यात्मिक-इसमें साथ को लगइह नहीं है। तीसरे, यह वठा कठिन प्रश्न है कि; मनुष्य खत है या भाग्यसे हो इसका निपटारा होता है।. यदि भाग्यसे निपटारा डोता है, तो पाप चर पुरय दोनो'का सनुष्य लिम्मेवर यहीं है। स्तरोदय से तो मलुप्य एक दशा में भाग्याधोन ो है | ये कठिनाइयाँ सें इसलिए सामने उपस्थित कर रदा हूं कि; इस विषयर्ते वाद-विवाद, तर्क और अस्वेपणकों वड़ी आवस्य- कता है। इससें सन्देद नहीं कि, इन प्रय्ों और शद्ाभों के रइते इुए भो जो इस दियासे क्तरा भी परिचित डे, वघ इसकी उपयोगिताकों मनी भाँति समभकता है भर उसको इसमें--यदि पूर्णा'शर्में नहीं तो अधिकांशमें--सत्यता अवश्य प्रतोतत डोती है । सुफे आशा है कि, यह पुस्तक लिन सोगो के लिए लिखों गई है, उनके लिए सारगप्रदर्शक घोर सच्चे सदायकका काम देगी। प्रत्येक मतुयक्तो अधिकार है कि, वह इसको भूजें सुककको बतलावे। वे सधन्धवाद स्तरोकृत चोंगी और थे संस्तरणमं निकाल दी जावेंगो । 'कछिन्दवाडा विनोत-- कार्तिक शक्त पूर्णिमा नि सम्दबत १८.७६, न्रजमोदन । यंग लाल वस्मों




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