श्री सुन्दर विलास | Shri Sundar Vilas

55/10 Ratings. 1 Review(s) अपना Review जोड़ें |
Shri Sundar Vilas by स्वामी सुन्दरवास जी महाराज - Sri Sundarvas Ji Maharaj

लेखक के बारे में अधिक जानकारी :

No Information available about स्वामी सुन्दरवास जी महाराज - Sri Sundarvas Ji Maharaj

Add Infomation AboutSri Sundarvas Ji Maharaj

पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

(Click to expand)
॥ गुरुदेव कौ अ्रग 11 [७ काहू सौं न रोष तोप काहू सौं न राग दोष, काहू सौ न वेरभाव काहू की न घात है काहू सो न वकवाद काहू सो नहीं विपाद काहूं सौ न सग न तौ कोऊ पक्षपात है ॥। काहू सौं न दुष्ट वैन काहू सी न लन दन, बह कौ विचार कछ और न सुहात है । सुन्दर कहत सोई ईशनि कौ महा इईश, सोई गुरुदेव जारक॑ दूसरी न वात है ॥१३॥। लोह कौ ज्यों पारस पखान हू पलटि लेत, कचन छवत्त होइ जग मे प्रमानिये । दम कौ ज्यों चदन हू पलडि लगाइ वास, ग्रापु के समान ता में शीतलता श्रानियें 1 कीट को ज्यों भूद्ध हू पलटि के करत भुड्, सोई उंडि जाइ ताकौ श्रचिरज मानियें । सुन्दर कहत यह समर प्रसिद्ध बात, सद्य शिष्य पलट स्‌, सत्यगुरु जानिये ॥१४। गुरु बिन ज्ञान नाहि गुरु बिन ध्यान सौहि, (१४) पारस पख न-पारसमणि । द्रूम-साधारण चुक्ष । भुट्ट-भोरा । सद्य तत्काल । पलटे-जीव से शिव वनादे




User Reviews

No Reviews | Add Yours...

Only Logged in Users Can Post Reviews, Login Now