गोरक्षा में सब की रक्षा | Goraksha Mein Sabki Raksha

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Gorakha Main Shabki Raksha by अज्ञात - Unknown

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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हु ः गोरक्षा सें सब की रक्षा तो भी वावा परमेश्वर का स्मरण करके आनंदपुर्वक जाएगा । वावा ने अपना कत्तेव्य कर लिया। गाय को बचाना तो ईइवर की झपा पर निभेर है। १३-३-१९७९ क : आरब्धम्‌ जय जगत्‌ [विनोवा] ' वाबा को खास कुछ कहने का वाकी नहीं रहता है। सिफ॑ एक छोटी-सी बात आपके सामने आज वावा रखता है। वावा उप- वास करेगा, इस वास्ते दूसरा कोई उपवास न करे। एक दिन का प्रतीकात्मक उपवास कर सकते हैं। इससे आगे जगह-जगह जाना है और काम करना है। वह कर सकते हैं । गोरक्षा तो भगवान कर्येंगे । वावा गोसेवा करेगा । जिस गाय का दूध बचपन से आज तक हम पीते आये हैं, उसकी रक्षा तो भगवान करेंगे । उसकी सेवा हम करेंगे । वावा मृंतिम समय तक जाशा करता है पु्ण सफलता की । बाकी भगवान की इच्छा । ः चावा भनाशा रखता है कि -भारतभर के सभी प्रांतों को, सब लोगों को, सब सेवकों को गोसेवा की प्रेरणा मिलेगी । अब वावा हमेशा के मुताबिक * समाप्तमू जय जगत्‌ ' नहीं कहेगा; ' आरव्यमू जय जगत्‌ ” कहेगा । (गोहत्याध्वंदी हेतु ता० २२-४-७९ को अनदान प्रारंम करते हुए)




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