कुरआन की छानबीन | Kuraan Ki Chhanbeen

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Kuraan Ki Chhanbeen  by दर्शनानंद - Darshananand

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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( श३ ) मकरू व मकरु ्लाहो वज्छाहा खय- के च्ददध रुले माकरीनु ॥ च्द र श्रहुवाद-मक्र किया उन्दौने (काफ़िसे ने) श्र सक्र किया झाताइ ने झट्लाह वेइतर मक्रर करने वाला दै। पाठकगण काफ़िरों का-जो ख़ुदा को नमानें-- ताज़ीयेत हिन्द की ४९७ दूफ़ा का अपराधी दोचा तो कोई शाश्चय्यंजनक वात नहीं परन्तु जिस समय कश्रनी ख़ुदा भी मकर व दगा करे झपितु बड़ा दगा घाज़ हो तो उसका विश्वास कौन करे ? इसी लिये वह घर २ ऋण मांगता है परन्तु झधिश्वासवश लोग देने को उद्यत नहीं होते । देखो झ्यत्र थी कृ रश्रानी ख़ुदा को ऋण की श्रा।चश्यकता प्रतीत इुई। कुर्शा न्‌ मन्ज्ञिल पारा २८ सूर्ये तगाबुन नवलकिशोर प्रेत प्रकाशित कू झाँन का पूछ्ठ ७९ . इस्तुकरिजुन्छाहा कजेल हसनय्युजाइफ़ हो लकु व यशफ़िलकुए वश्छाहो शकूरन हलीस ॥ झूनुवाद-यदि ऋण दो शरन्लाद को.। कण शच्छा दुसुना करेगा उस्रको लुस्दारे चास्ते और वह होगा वारते छुस्टारे ब्मौर झल्ला कृद्रदान है--श्रमल बाला । पाठकपण देखिये कू ध्यानी सदा वार २ ऋण मांगता है श्र श्विश्वालनीय ( होने ) के कारण दु्ुना देने का व




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