प्राकृत मार्गोपदेशिका | Prakrit Margopdeshika

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Prakrit Margopdeshika by पं. बहेचरदास जीवराज - Pt. Bahechardas jeevraj
लेखक :
पुस्तक का साइज़ : 4.5 MB
कुल पृष्ठ : 196
श्रेणी :
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पं. बहेचरदास जीवराज - Pt. Bahechardas jeevraj

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कद्दू --वहेवुं निन्दू--निंदवु कुणू कर्‌--क्खूं सूसू--सुकाबुं.. रूमू--रोप कवो. (७ थे था तर--तखुं. सुण--सांभलबुं निणू--नितहुं चिणु---एकठुं कब वाक्यो-- ( मे ) पाछीए छीए. (तमे ) छो छो. ( अमे ) जाणीए छीए. ( तेओ ) पढेछे ( तमे ) वींटोछो. ( तमें ) देखोछो. ( तमे ) एक करोछो ( तेओ ) सांभेछे. ( अमे ) मुंझाइए छीए ( तेओ ) नीतेछे. ( जमे ) छडीए छीए ( तेओ ) नमेछे. ( अमे ) निंदीए. छीए. ( तैओ ) ढेछे - ( ते ) वे मुझाओछो. ( तेओ ) सूकायछे. ( तेओ 9 वे नाचेछे ( जमे) कहीए छीए. ( तमें ) तोडोछो. (ततेओ है स्प्श करेछे ( तेओ ) जीवेछे. ( असे ) करीए छीए (ते ) छो. ( तेओ ) पीएछे. ( तमे ) वे शोभोछो. | ( तेओ ) वे सांमिछेछें . (तेओ तरेछे. (1 ( तेंओ ) रांघेछे. . . . ( अभे ) रोप करीए छीए




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