गीता का व्यवहार - दर्शन | Gita Ka Vyavhar Darshan

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Gita Ka Vyavhar Darshan by रामगोपाल मोहता - Ramgopal Mohta
लेखक :
पुस्तक का साइज़ : 20.47 MB
कुल पृष्ठ : 576
श्रेणी :
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रामगोपाल मोहता - Ramgopal Mohta

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त् त्याज्यं दोपवदित्येके कर्म प्राहुर्मनीपिण । यज्ञदानतप.कर्म न प्याज्यमित्ति चापरे ॥ ३ (मी० झष १८) पिफिश्ताछू फिपड फाण्ड्लाए पट ( 0 (णाहिएचक शत 8 00 लिए रापठिगालाए छा दशक जिनका आल दिपाहीपास घने 5 पृ 0 पिडल्‍ा हए पिंड प्ेलीपाईठ साए हा. दितड़ बापिटा निश्चय श्यणु में सब्र त्यागे भरतसत्तस 1 काला वीर हु०05 6 0 8१९ ना यज्ञदानतप कर्म न त्याज्यं कार्यमेव तव । यज्ञो दान तपश्नेव पावनानि सनीपिणासू ॥ श ॥ एतान्यपि तु कर्माणि संग स्यक्ता फलानि च । कर्तेच्यानीति से पार्थ निश्चित सत्तमुत्तससु ॥ ६ ॥ छौत्रछुकापा ता उ्ताडपात उड काएड टाफषिएधए था सच पडा 000 0 (1९ फूलणिपाधाटट 0 यज्ञ दान तप पा कर्म पे सिए डधिट& पिता ता (6 05 पे शशि दणारटठ एाएफ ला घुुण्णा छिएएफाएए पपयाइ 7पुघाा दफाई परीएाट (का 9९ ह्र0 सिधपि0घापपाए 0 पप्रडि कुलट्डटाइ0लमे 00 कहा हाए0पाएं 1 दिए पता 0 5दप्युकड 07 उशापठााधिफा -- नियतस्थ तु संन्यास कर्मणो नोपपधते । पप्पू काश शिणा एाहड एप प्रेपॉछि एप. घाह. फाठएा उठी ध5 कतााएल (लाफतिका एड झाण्वों डाला 09 फिल्टर एणापशापाह्त 98 मि क5 प्रधप एक 0 फिट दा फ0 शइतूगा 05 वि पार हए 200. पिंद १५100 0९8 पिस्पेपषि लि ८एछि & इिट . फ़रािएए इश्टीरघाए घडू. इएपेंप्प घत१पावधिछुट पर फिपाहटी दादा 1000६ पाप #पि(शाटफा ६0 15 पा 15 पार इफसा प्राप्त भा फ0 15 छध्स टापादक एल 1900 नह सात्चिक घा दिल भीता एपजववएा& रा 0९. फाषापुपस्पे (66. छा 0६९ पा जिफएएभया रवि 15 व. छण्ध्डी 0 लगा. त्ाएँ जरा 0 क्लापएटबधिएणा . जशयपा सवाए दा 1006 0पॉइ एं०टीक्ाहतें कि उर् 0६ ९ 0 01100 पा पं० दा 01 सा पाए्फलाश्ते भावी 2 इशाह 01 इाइ0१५ वात होगा 0 (न योत्य इति गोदिन्दूसुवस्वा रप्णीं बभ्ूव ह) त88प्ास्वे किन वा हा द्रसावानु माँ पिएं दावे एव फट फन्टलएइट रा गिर ईणाणफाएइ शणशैडनना ने सोद स्टविलंब्घा प्व्मसादान्मयाउच्युत । स्थितोडस्मि गतसदेह करिप्ये वचन तव ॥ ६ ॥




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