प्राचीन भारत | Prachin Bharat

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Prachin Bharat by रमेशचंद्र मजबूदार - Ramesh Chandra Majboodar

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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(श) का प्रयाव किस प्रकार पढ़ता है, इसका स्पहीकरण एक उदाहरण हारा किया जा _ सकता है | आज दक्षिण भारत में होने वाले किसी दंगे की सूचना दिल्‍ली स्थित ' सरकार के पास तीन मिनट से कम समय में पहुँच जायेगी और उतने ही दिनों के - भीतर प्यत्ति सेना भी पहुँचाई जा साकती है । किन्तु यदि वही उपद्रव अशोक के समय में हुआ होता तो उसकी सूचना पाटलिपुत्र तीन मास से कम समय में न पहुँच पाती और कम से कम उसका दूना समय आवध्यक सेना मेजने में मी लगता । भारतीय इतिहास को समझने के लिए इन तथ्यों को अच्छी तरह ध्यान में रखने की सर्वोपरि आावइ्यकता है । ऐसा न करने के फलस्वरूप हो इंतिहासकारों ते बहुघा निर्णय सम्बन्धी में की हैं ; उदाहरणत: भारत के उपरोक्त की... बाहर अभियान का कोई लिखित प्रमाण न मिलने के कारण महत्ता उन्होंने यह. समझ लिया कि मारतीय साहसों नहीं थे और उनमें तैनिक योग्यता का अमाव था । यह बात भ्रुला दो आती है कि भारत के सैनिक अभियानों के लिए उसका अपना उपप्रायद्वोप तथा वृहतर भारत, हिन्द चीन तथा प्रशान्त द्वीप समूह ही इतने विस्तृत क्षेत्र थे कि उसके बाहर जाने का लोभ उन्हें हो हो नहीं सकता था । मिलियों, असोरियों, अथवा काबुल निवासियों द्वारा शासित बड़े से बड़े साम्राज्य भी प्राचीन काल में ह्रिन्दुकुश और हलमुद तक हो फैले थे और थे भारत और उसके पूरब के औपनिवेशिक साम्राज्य के विस्तार से कहीं कम हो थे। पारसीक और रोमक साम्राज्य एवं स्वल्प काल के लिये सिकन्दर हारा विजित प्रदेश इस वृहसर भारत के बराबर अथवा उससे कुछ ही बड़े थे | चौदहवें जुई और नेपोलियन के साम्राज्य तो उसकी विक्ञालता की तुलना में नगण्य ही थे | आन्तरिक प्राकृतिक स्वरूप के सम्बन्ध में सबसे उल्लेखनीय मध्य में स्थित पर्वतमालायें हैं । वे ऐसी प्रभूत सीमायें हैं जो उत्तर भारत और दक्षिण को अलग करती हैं । उसमें दो समानान्तर पर्वत श्यृद्धलाएँ हैं-- आम्तरिक प्राक- उत्तर में विन्ध्य, जिनमें भनरेर और कैमूर पर्वत श्यद्धलाएँ तिक स्वरूप... सम्मिलित हैं, तथा दक्षिण में सतपुड़ा जिसके साथ महोदय और मेकल पव॑त सम्मिलित हैं । इन दोनों के बीच एक पतली घाटी है जिसमें होकर नमंदा बहती है । इस नदी एवं पर्वत और इस प्रदेश के भले जंगलों तथा छोटा नागपुर ने यातायात इतना कठिन बना दिया कि उत्तर शर दक्षिण के निवासियों में सदैव एक स्पष्ट भेद रहा धर दोनों भागों का इतिहास साधारणत; स्वतन्त्र रुप से ही विकसित हुआ, यद्यपि समय २ पर दोनों के बोच सम्पर्क भी होते रहे हैं ।




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