यशोधरा | Yashodhara

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Yashodhara by मैथिलीशरण गुप्त - Maithili Sharan Gupt
लेखक :
पुस्तक का साइज़ : 1.2 MB
कुल पृष्ठ : 206
श्रेणी :
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मैथिलीशरण गुप्त - Maithili Sharan Gupt

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ययोपरा श्प बता जोक क्या इसीलिए है यह जोवन का फूल हाय पका प्रौर कच्चा फल इसका तोड तोड़कर काल साय 1 एक बार तो किसी जन्म के साथ मरण भनिवार हाय वार वार घिक्ार किन्तु यदि रहे मृत्यु का दोप दाय झमूनपुष्र उठ कुछ उपाय कर चल चुप द्वार न वेठ हाय सोज रहा है बया सहाय तू ? मेट झाप ही. झन्तराय 1 पु पडी रह तू मेरी मव-मुक्ति मुक्ति-हेनु जाता हूं यदद मैं मुक्ति सुक्ति घस मुक्ति ४ मेरा मानस -हंत सुनेगा भोर कोन-्सो थुक्ति ? गुक्ताफल निट्देन्द्ध चुनेगा चुन ले कोई धुक्ति।




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