अफलातून की सामाजिक व्यवस्था | Aflatoon Ki Samajik Vyavastha

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Aflatoon Ki Samajik Vyavastha by अज्ञात - Unknown

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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द +'हफलावूनकी सामाजिक व्यवस्था 1 तक पहले सिरेसे परिवर्तन न किया जाय, तयत्तक राजकोय संसारका खुघार न होगा । उसका यदद च्रिश्वास होगया था कि ज्ववतक सत्वज्ञानफा साश्राज्य नहदीं स्थापित होता तवतक न्यायकी विजय न होगी छोर इसके लिये यह श्रावश्यक हि कि या तो तत्वशानी ही राजा हो या राजा लोग तत्वन्ानी चने । “ईसा पूर्व ३८७ ( घि० पू० ३३०) बर्पमें जत्र बह इटली और सिसलीको गया तव इन्दीं उपरिलिजित घपिचारसका संस्कार उसके मनपर पड़ा हुआ थां। इस समय इन देशोमें थड़ा झन्घेर मचा हुश्आा था । परन्तु जब डियोन नामक ब्यसिसि अफलातवूनकी भेंट हुई तत्र उसपर इसका इतना प्रभाव पड़ा कि शीघ्र दी उक्त व्यक्ति इसके विचार्योमें दी क्षित होगया । घीस चर्ष चाद जब श्रथम डायोनीशियसकी खत्यु डुई, तथ द्वितीय डायोमीशियस सायरंक्रयूसका राजा हुश्ा । श्रफलातूनके चिचायके अरमावकी रखति डियोनके सनमें अब भी जाएत थी, इस फारण उसे पेसो जान पड़ा कि इस दार्सनिकफा सुभपर जैसा प्रभाव पड़ा है, वैसा हो डायोनीशियसपर पड़े यिना न रदेंगा। इस कारण दितीय डायोनोशियससे कह कर डियोनने अफलादूनकों दरबारमें घुलवाया । स्वयं डियोनने भी उसे लिया थां कि श्रव 'दाशनिक राज्ञा' धनामेका अधसर प्राप्त हुझा है । अफलादुनको इस फार्सेमें सफलता पानेकी बहुत फम झाशा थी, पर उसे यह श्रपना कतंम्य जाने पड़ा कि में चने विचार्याको प्रत्यक्ष फाय रूप में परिणत कर उचित कादन शोर शासन-ध्ययस्था तैयार फरनेका: प्रयल फू 1 ध्ाये अबसरको ररोकर केयल “बातूनी' फदलानेफी उसे सास लगी । उसे घसा जान पड़ा कि यदि दार्शनिक विद्यार्युवि श्नुसार प्रत्यक्ष कार्य कर दिपलानेमें मैं घागा-पीछा करता हैं नो उन




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