ओबर्ज की रात | Obarj Ki Rat

[adinserter block="2"]
लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
0.46 MB
कुल पष्ठ :
110
श्रेणी :
हमें इस पुस्तक की श्रेणी ज्ञात नहीं है |आप कमेन्ट में श्रेणी सुझा सकते हैं |
यदि इस पुस्तक की जानकारी में कोई त्रुटि है या फिर आपको इस पुस्तक से सम्बंधित कोई भी सुझाव अथवा शिकायत है तो उसे यहाँ दर्ज कर सकते हैं
लेखक के बारे में अधिक जानकारी :
पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)4३जचती हो खूब
सजनी हो खूब
दु्हिन सी,
तेरे मुनहते बाल
ये सोने के बाल
रे हैं
मम रहे हैं
मूच रहे है
तेरे बन्धों पर
यह ममता यौवन
यह पुवारता यौदन
यह ललकारता यौवन
जगा देता है
जीने की हसरत,
देखते हो, यद निधोताइट !
यह सारा शमा, रंगीन छत,
बेठे हुए लोग, टूज में
प्रोज में,
रादके पाम वात एक, भ
धीम एक
तरीका एक
मकसद एक ।”
हों, मैं दुमहिन
हर शाम बी दुलदिन
शाम के साथ सुद्दाग आता
सुबह के माथ दुदाग आता
शाम के साथ प्यार आता
शाम के राथ यार आता
शाम के साथ,
प्यार में ज्वार झादा
सुवह के साय उतार बाता
शाम है, जाम है
शाम है, शराव हैं
दाम है, धवाव हैओवर्ज्ध की 1
User Reviews
No Reviews | Add Yours...