मोहन राकेश के साहित्य में समसामयिक चेतना | Mohan Rakesh K Sahitya Mein Samsamyik Chetna

[adinserter block="2"]
Add Infomation AboutAnil Kumar Samadhiya
लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
162.92 MB
कुल पष्ठ :
178
श्रेणी :
हमें इस पुस्तक की श्रेणी ज्ञात नहीं है |आप कमेन्ट में श्रेणी सुझा सकते हैं |
यदि इस पुस्तक की जानकारी में कोई त्रुटि है या फिर आपको इस पुस्तक से सम्बंधित कोई भी सुझाव अथवा शिकायत है तो उसे यहाँ दर्ज कर सकते हैं
लेखक के बारे में अधिक जानकारी :
No Information available about अनिल कुमार समाधिया - Anil Kumar Samadhiya
पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)जय वर्मा का यह मत लेखकीय टरष्टिटकौ्ण को ही पुष्ट कश्ता हुआनए बादल कहानी संग्रह कै माध्यम सै सहज अनुभूति के साथ कह
स्थित्िशील और गतिशील व्यक्तिगत ओर सामाजिक स्त
मके सामाजिक और भौतिक परिपर्व :लेखक जीवन सत्य कौ आषिक रूप मैं रुखौदता है | आज का जीवन तो इतना विशाल
छह एवं जलिल है, जिसे मौहन राकेश ने समता कै प्रयात
नकै द्वारा प्रस्तुत कहानियाँ मैं जीवन के जटिल से जटिलतर पर्त
ड़ गए हैं। व्यक्तिगत जीवनाजुभव, वर्ण्य-विषय को गहराई मैं पहचानने मैं
क त्तत कधा-संकलन मैं बहुधमीदुष्टिटयाँ
ल्याँ कौ राफैश ने प्रस्तुत कहानियाँ
'एः कह सकी हि ||थम जीवन का यधावत-सप
नियाँ मैं अपनायी गई 1 ” नर-
User Reviews
No Reviews | Add Yours...