भारत के महान क्रांतिकारी | Bharat Ke Mahan Krantikari

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
10.24 MB
कुल पष्ठ :
212
श्रेणी :
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धीरेन्द्र वर्मा - Dheerendra Verma
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लल्लन प्रसाद ब्यास - Lallan Prasad Byas
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)[१० ]ओर उसके वाद भी काफी समय तक उन पर विभिन्न प्रकार
के प्रतिबंध लगाए रुए |
क्रानिकारियों का प्रेरकहम आज चद्रशखर “'आजाद', भ्रगतसिह आदि क्राति-
कारियों के चित्रा ओर मूर्तियों को पूजते है, कितु इस जीवित
ऋ्रातिकारी बनी यह उपेक्षा हो रही है, जिससे कभी उपयृक्त
क्रातिकारीगण जपने कार्यो में प्रेरणा एवं मांग - दर्शन प्राप्त
करते य तथा उनकी क्राति-सवथी पुस्तकों को गीता या वाइ-
बिन नी तरह पूजते थे ।यह सभव है कि सावर्करजी की मान्यताओं और
बिच से देश के अनेक जीषस्थ नेतागण और देशवासी सह-
मत न हो दोकिन यह नसहमति और बविचार-भिन्नता को
उनके प्रति वतमान उदासीनता ओर उपेक्षा तथा विगत अचधि-
स्मरणीय देश - सेवाओं के विस्मरण का कारण बनाना उचित
नहीं । यह हमारे सामाजिर अथवा राष्ट्रीय जीवन की एक
अवाछित एव अहितकर प्रवत्ति का द्योतक है ।प्रबर हिंदू राष्ट्रवाद के समथंक
सावरकरजी प्रखर हिंदू राष्ट्रवाद के समथक , जो वह
अपने क्रातिकारी जीवन मे भी थे, बाद मे भी रहे और आज
भी है। वह हिदुत्व को साप्रदायिक नहीं मानते । उनका
कहना है--“हमे सप्रदाय कहना मूखंता है । हम हिंदू स्वत एक
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