यूनानी इतिहासकारो का भारत - वर्णन | Unani Itihas Karo Ka Bharat Varnan

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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(४ पाये जाते हैं। इस पेतिद्दासिक चूत्तान्त में संसार के मिंन्न-भिन्न राष्ट्रों के इतिहास का उल्लेख है। भारत के चविपय में यद्यपि च्रत्तान्त इतना चिस्तारपूर्वक नहीं है जितना घोर देशों का है, फिर भी इससे इस परिश्मी विद्वान की योग्यता और झन्वेपण का पता चलता दै | इसने' ना मोखिक प्रमाणों के झाघार पर लिखा है। समाचार के उद्गम को सत्यता की कसौटा पर न कसकफर इसने उनको पूर्णतया सत्य मान लिया । इससे इतिढास के पिता' की उपाधि कुछ आश्रय अवश्य रखती है, श्र यह वात कम नहीं कि केवल मौखिक प्रमांणों पर विश्वास रखते हुए उस काल में इसने ऐसा महान अन्थ लिखा जिससे इसकी कीर्ति कोने-कोने में फेल गई। साहित्यिक युग में इस अ्रन्थ ने एक नवीन 'छोदश स्थापित कर दिया, जिसका उदाद्दरणु पदले न था । यह पुस्तक श्रब भी उसी रूप में दे, झोर इससे ग्रस्थकार की सदन टपकती दे देरोडोट्स के पश्चात्‌ दूसरा यूनानी इतिहासक्ञ ईरानी सम्राट आटोज़रकसलीज़ का चिकित्सक टेखियस था यह उनोफोन का समकालीन था, शोर इसी ने सबसे पहले भारत का चणन प्रत्यच्त रुप से किया है, जो उस समय तक युनानियां के लिये झंधकार देश था । इेरानी सम्रादू के चिकित्सक होने के कारण ई० एू० ४१६-३९८ तक उसे राजसभा में केवल उन इरानी राजकमंचारी से हो नहीं जो भारत हो झ्ाये थे, वरन्‌ भारत से श्राये इुए मद्दानुभावों से संस्ग का भी झवसर मिला। इस चात १-पुस्तक ३-६७-१०दु; ४, ४४, ७-दुश, परे ।




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