माधवनिदानम | Madhavnidanam

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Madhavnidanam   by खेमराज श्री कृष्णदास - Khemraj Shri Krishnadas

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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। (१५) विषय, शछांक, | विषय, ांक सच्रिपातोपदंशके ल्ण र४| काकणकुपके कि) असाध्य ल० ग्यारह झुद्कुछोवे लग 13 लिगवर्तिके ल० २४६ किटिभकुप्ठके ल० भर फिरंगरोगनिदानमू । चंपादिककि ल० २५९५ फिरंगशब्दकी निरुक्ति २४६| ल० दान २४७ दट्ठमण्डल के ११ इसका रूप १. | च्चर्मदलके लग ही फिरंग रोगक़े उपद्रव १. | पामसाकुष्टके ल० रॉ साध्यासाध्य कष्टसाध्यरव | यच्छके ल० शूकनिदानम्‌ । विस्फोटक २५६ सर्पपिकाफे ० २४८ | ले० थी हर ऐ**| विचचिकाफे ल० 'अरंथितके ल० ५. | घातजादिक कुष्ठोंकि लग हि कमिकाके ल० ४५० रसादि सप्तघाठुगतकुष्ठोंके ल० ने अलजीके ल० ++. | रक्तगतकके ल० शी मुदितके ल० 7१. | मांसगतफुष्टके ल० १ संमूठपिटिकाफे ल० १ . | मेदोगतकुप्टके ल० रण अवसन्यके ल० +. | भस्थिमजागतकु््के ल० ११ पुष्करिकाके ल० | शुक्रातंवगतकुष्ठके ल० 1 स्पर्शद्दनिके लग २५० | साप्यादिमेद ५८ उत्तमाफके ल० +. | ऊषमें प्रधानदोषकि ल० 1 शत्तपोनकके ल० +. |किचासनिदान ५९, र्ववपाक्े ल० +. | वातादिभेदस उनके ल० श लक १9 श्वित्रके साप्पासाध्य १३ गा ल० 1). | किछासके असाध्य छ० 11 'सपाकके लग विद्राचे के दा था है तहलका मर तिलकालकफे ल० १ शातापत्तानदानमू । ससाध्य शूकदो पढ़े, छ० था खा समाप्ति व पूर्वरूप २६१ ने ऊष्टीनदानमू । उद्दका दूसरा घ १) दोषाधिक्यसे कुछके भेद २५२ फोके छ० ही १) या ही अम्छाफ्त्तिनिदानसू । सप्त मसद्दाकुष्ठोंके ल० और्दवरकुष्ठके ल० हे | हम स्वरूप... २६२ मडलऊप्ठके ल० शक ले दी ऋषजिदक ग्ठके ल० | भघोगत ल० 1६ पुण्डरीककुण्ठफे लग - जप उध्चंगत अम्ल पित्तफे लत बुक सिध्मकुष्ठफे छ० रा ल० २६३ ः “* म्लपित्तके साध्यासाध्यविचार *'




User Reviews

  • bhikam jangid11a

    at 2021-02-11 04:11:42
    Rated : 1 out of 10 stars.
    आयुर्वेद
  • bhikam jangid11a

    at 2021-02-11 04:05:37
    Rated : 1 out of 10 stars.
    बहुत ही अच्छी पुस्तक है
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