वैदिककाल का इतिहास | Vaidik Kaal Ka Itihas

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Vaidik Kaal Ka Itihas by आर्य्यमुनिजी - Aaryyamuniji

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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१४ वेदिककाल का इतिहास २ नाभा-परियाला-जींद जीवित न होते तब- सरहन्द बीच मंडे होते मुगलान के । कोलज झकाल चाल ठाल न निरोली होती- पजक होजाते लोग मढ़ी और मसान के ॥। वेद भगवाद ज्ञान यान का न नाम होता- जप द्ोम यज्ञ मिटजाते हिन्दुब्ान के ॥ मलिन मलेच्छ रुप धारी नर नारी होते- जो न तीर छूटते गोषिन्द्सिह ज्वान के ॥ _ चेदिक्षर्म का सेवक देवदत्तशमां काशी हि हगि ८. 1 कि के जल.




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