विश्व इतिहास (प्राचीन काल) | Vishv Itihas (Prachin Kaal)

Vishv Itihas (Prachin Kaal) by डॉ. रामप्रसादत्रिपाठी - Dr. Ramprasad Tripathi

लेखक के बारे में अधिक जानकारी :

No Information available about डॉ. रामप्रसादत्रिपाठी - Dr. Ramprasad Tripathi

Add Infomation About. Dr. Ramprasad Tripathi

पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

(Click to expand)
ना रू ना टूसरा उल्लेखनीय मत डा० डेविडसन ब्रेक का ते । जापवी राय से जादिस मानवसप्टि पूव मायासीन युग सवा बराट वप पूत में वानरा की उस कोटि स उत्पत्र हुई थी जिमस वनमानम रा क्रमश मनप्य का विकास हुआ । उसका समह उत्तरा भारत से ही जफ़ीका की जार वढता गया 1 यह मत मनुजी के कथन से मिल्ता-जलता है... एननेपप्रसतस्य सकाशादग्रजमसन इलाक की सोपाथ का जा पंयिया सब सानवा उसकी पुष्टि वरता ह।. चरित्म साब्त वी ब्यारया व्यापक रुप स करन मं जापत्ति की विष गुजरा न हीनी चादिए । मट अथवा कािटास के कथना का स्गत विचानमल्क न हाते टुए मीं जनुश्ति या विश्वास वस्तुस्थिति के जटसार हा सकता है 1 उस मत के मानें म कुड का टुर बरने व लिए एन्सवथ हश्टिगटन ने यह निश्चित किया कि तिम्वत जार उसवे जास पास के मुसाग स आत्म मनप्य का होना सम्मव है । यह जातिकारी छटना वीस या तीम लाख वप पूद हई जय हिमार्य समुद्र वी सतह स कुछ ऊँचा रहा होगा । उस यग में तिव्वा जार उसके जासपास के जद जौर वसाटि वनस्पतिया स भर हुए ये । ज्या ज्या हिमालय उठता गया जोर वातावरण होता गया त्या-त्या वना की सघनता बम होती गयी आर घाटिया तथा मटान निकलते गये जा घास स हर मर ये । उनसे नार्पित हाकर अनेक प्रकार के पा जिनसे हिसक पता भी रह होगे घर उधर धमत फिरत रह । ला के यतने आर माजन दी प्राप्ति के लिए जार उत्माहों बट जाग बतत विखरत जौर फरत चर गये । मपुप्या व कुछ बात नप्ट हा गये कुछ बम विकमित टूए जार कुछ वनमानुस की जवस्था मे पीछे रत गये । उपयुवन वर्प्ठि और उद्यमशीर वला की वद्धि जौर विकास शीध्रता से हुए यता तक कि वे वनसादुम स प्रगतिशील मापप्य वह हो गये जोर चारा जोर फर गये। तिवत से जाटिम मट्प्य वी सप्टि का हाना स्वामी दयानल मा मानते है. ययपि कारगणना से सेट हे । मदामारत से एक लतु श्रुति के जरसार सप्तचर तीथ के पास बितस्ता वी रॉक्विश्वूत लविका नटां के तट पर विप्रा वी सप्टि का सकते है । एक विद्वान को राय मे चिप्र स आहाय जाय वा है । नर-नारायण के यदरिकाधम म तप बरसे की पौराणिक कथा सम्भव है फि लातिम मनप्य के वटरिवाधम के जाम-पास हाने का सकंत रखती हो । मी प्रकार वी अय कल्पनाए हा सकती हू अभी तक कार सत्हरहित सिद्धान्त प्रतिप्सिति नटी हा पाया । यह सी वटुत सम्मव ह दि एशिया आर नपफ्रीवा




User Reviews

No Reviews | Add Yours...

Only Logged in Users Can Post Reviews, Login Now