हम और हमारे बालक | Hum Aur Hamare Balak

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Book Image : हम और हमारे बालक  - Hum Aur Hamare Balak
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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: जैककाम करना चाहता है, इसीलिए वह गलत रास्ते पर जा रहा है ! साधारणतया होता यह है कि जिस काम को हमने नहीं किया है हम उसे गलत कहने लग जाते है + हमने ऐसे बहुत-से माता-पिता देखे है, जो शुरू मे अपने लड़के को चाय पीते देखकर घोर भर्त्सना किया करते थे, परन्तु अब स्वय दिन मे तीन बार चाय पीते है । हमने ऐसे भी माता-पिता देखे है, जो स्वय भॉग अथवा शराब के आदी है, परन्तु लड़के के हाथ मे चाय की प्याली फटी श्रॉख नहीं देख सकते । दिन प्रति दिन के जीवन से एक नहीं ऐसे अनेक उदा- हूरण प्रस्तुत किये जा सकते है, जब कि. माता-पिता गलत और मर्जी अथवा दस्तूर के खिलाफ मे कोई फर्क नहीं समभते और बच्चों को डाटने लगते है ।(२) जब हमारे माता-पिता हमे डाटते थे, तब हमारे ऊपर उसकी क्या प्रतिक्रिया होती थी ? क्या हम उनकी बात मान लेते थे ? क्या हम वह काम कभी नहीं करते थे ?(३) हमने अब तक जिन कामों के लिए अपने बच्चों को डाटा है, हमारे बच्चो ने क्या वे काम नहीं किये ?इन उपयु क्त तीन प्रदनो के उत्तरों को सामने रखकर आप इसी नतीजे पर पहुँचेगे कि (१) डाट लगाने वाले माता-पिता को बालक अपना दाजू--अपने मार्ग का रोडा समभने लगता है, तथा (२) उस काम के करने में वह विशेष उत्साह के साथ प्रवृत्त होता है । वह सोचता है कि आखिर बात क्या है, जो ये मुक्त इंस काम को नहीं करने देते । कहने की आवध्यकता नही है कि उत्साह की यह अतिशयता ही बालकों को पथ-श्रप्ठ कर देती है ।मेरी उम्र उस समय लगभग पाँच वर्ष की थी, में एक शादी में गया । वहाँ मैने स्त्रियों को कुछ गालियाँ गाते सुना, मैने उन्हे याद कर लिया और गाता हुआ घर आया । मेरी मौसी ने मुझे इस जोर से डाटा कि में सहम कर चुप हो गया । लगभग ४-६ दिन बाद मैने अपने नौकर से पूछा कि इस चीज को गाने में क्या हज है, और मौसी ने मुझे क्यों डाटा ? नौकर ने उस गाली को




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