काव्य में पादप पुष्प | Kavya Men Padap Pushp
श्रेणी : साहित्य / Literature

[adinserter block="2"]
लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
18 MB
कुल पष्ठ :
285
श्रेणी :
यदि इस पुस्तक की जानकारी में कोई त्रुटि है या फिर आपको इस पुस्तक से सम्बंधित कोई भी सुझाव अथवा शिकायत है तो उसे यहाँ दर्ज कर सकते हैं
लेखक के बारे में अधिक जानकारी :
पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)धार्मिक - विचारबनिजों भवन्तु दं नो
ऋग्वेद ७. २४. ४.
वृक्ष हमारे लिए शान्तिदायक हों
गा रद ग्फभगवान् कृष्ण कहते हैं--“ब्रज के पेड़ बड़े-बड़े ऋषि हैं जो वृक्ष बनकर मेरा
और श्री बलराम जी का दर्शन करते हैं ।”'
-श्रीसद्भागवत
“हुरा पेड़ काटने वाले और जानवर को मारनेवाले को खुदा माफ़ नहीं
कर सकता ।”-कुरान-शरीफ़नए 0 0 मननमलए ४ १ कक भी 8 ज्कय न ट | १
0 नि
०: [ः भी ज़ी पे
। कर हक थ
पक) ७श्र डर
हद टझा
द
2
रद कै 0 /क ही (00!
किक:2४ व ग नव'छ 1
थे पु || जा दि है
1 शक क ग दर ््य हा कफ कक
| ् ही थे ् थक फिर, थे थ हे रे कु के ” न्य * 10, व की गा न ह* | दी
क 5 द के * का त हुग्प नल थक की भ हज ्ड ढक 0 दर कर गा 4५2
हे यु थ् डक हि ४ कद रा मम दा] |. «है, कपल का पं दर
| ०2। जग कक कक ज क दा की
“कर. दर दी छा लि 5 रे श भ 101 न मी कि
पक शी ड ह 1 ० 7 # ९ कं, 0
थ मजे कद 221 ज न न सर हर 2: कक
का श शक के कईह..
श्
लि है
नह
ग्( हू कीके
न,
User Reviews
No Reviews | Add Yours...