अपना राज्य | Apna Rajya
श्रेणी : इतिहास / History

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
1 MB
कुल पष्ठ :
84
श्रेणी :
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लेखकों के बारे में अधिक जानकारी :
ठाकुरदास बंग - Thakurdas Bang
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वैजापुरकर - Vaijapurkar
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)श्२् अपना राउयअनेक कार्य शुरू है । किसान-सभाएँ और मजदूरों के 'यूनियन'
वेतन-बृद्धि, छुट्टियों आदि मॉगकर मजदूरों का जीवन सुखी
करने का यरन कर रहे है। लेकिन इन सब सुधारों से वर्तमान
पूंजीवादी समाज-रचना वदल नहीं सफती । धनवान धनवादु ही
रहेगा । गरीबों की गरीबी किचित् दूर होगी । कदाचितु उतना
भी न होगा, क्योकि क्राति के पूर्व सुधारों से कभी-कभी सुल रोग
और श्रघिक बढ जाता है । श्राज के समाज मे तकाबी दी जाय
या सुधार लागू किये जायें, तो भी उनका लाभ ऊपर के वर्गों को
ही मिलता है । पैसे के पास ही पैसा जाता है। जिनके पास
कुछ नहीं है, उन्हें इन सुधारों से कोई लाभ नहीं मिलता । जिसके
पास खेत नहीं, उसे झ्राधिक मदद भी नहीं मिलती । गरीब
झ्रादमी स्कूल का लाभ कैसे उठा सकता है * उसे तो श्रपने बच्चे
को प्णुग्नो के पीछे ही भेजना पड़ता है झौर लडकी के जिम्मे
घर में छोटे-छोटे बच्चो को संभालने का काम श्राता है ।दूसरी पंचवर्षीय योजना में पाँच हजार झ्ावादी के नीचे-
वाले गाँवों पर जो रकम सर्च होनेवाली है, उससे पाँचगुनी
रकम पाँच हजार जनसंग्या से ऊपरवाले कसबों श्रीर दादरों
पर से होनेवाली है। कागेस के सन्नी श्री श्रीमन्नारायणणी
यहते हैं : सामुदायिक विकगस-योजनाएँं श्रीर विस्तार-योजनाएँ
निम्नवर्ग की श्राधिक स्थिति सुधारने में सफल नहीं हुई ।'
इसलिए यह भ्रन्त्योदय या श्रर्यात् सबसे नीले के लोगों के उदय
था कायकम नहीं है । झोर फिर इस योजना की गति भी बटूत
हो मंद है । पौच वर्षों में देश का उत्पादन परचीस प्रतियात बढ़ने-
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