पाश्चात्य तर्क शास्त्र भाग 1 | Paschatya Tark Shastra Bhag 1

[adinserter block="2"]
Add Infomation AboutLaxmichandra jain
लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
12 MB
कुल पष्ठ :
596
श्रेणी :
हमें इस पुस्तक की श्रेणी ज्ञात नहीं है |आप कमेन्ट में श्रेणी सुझा सकते हैं |
यदि इस पुस्तक की जानकारी में कोई त्रुटि है या फिर आपको इस पुस्तक से सम्बंधित कोई भी सुझाव अथवा शिकायत है तो उसे यहाँ दर्ज कर सकते हैं
लेखक के बारे में अधिक जानकारी :
No Information available about लक्ष्मीचन्द्र जैन - Laxmichandra jain
पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)( १७ )
(४) हेतुफलाब्रित से वैकल्पिक
है ८. विश्षेषण सयोगातुमान
$ै ६ मिश्रप्रत्ययानुमात
नवाँ अध्याय
शवुमान प्रकरण
निगमन-विधि
दूसरा भाग
परंपरानुमान
न्याय वाक्य
(. गुढ)
| १. न्यायवाक्य क्या है?
6 २. न्यायवाक्य का स्वरूप
है ३. प्राच्य और पाइ्चात्य पढ्तियों में न्यायवाक्य
$ ४. न्यायवावय के प्रकार
(१) शुद्ध निरपेक्ष न्यायवाक्य
(२) शुद्ध हेहुफलाधित न्यायवाव्य
(दे) मिश्र न्यायवाक्य
(क) हेतुफलाबित निरेक्ष
(ख) वैकल्पिक निरपेक्ष
(ग) मेण्डक-प्रयोग
पृ
हद
रद
रद
१४७
रद्द
५१
र्५५
र्५४
१४५६
रु
१४६
्श्
१्श्७
User Reviews
No Reviews | Add Yours...