महाबंधों भाग - 4 | Mahabandho Bhag - 4

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
25 MB
कुल पष्ठ :
462
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)पं८
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उबरिमगेवज्या
सरीरपजती गाइदि
झगख० अत्यि ब
बेद ०-शामा० ओघं ।
सेसमशुदिसमभंगों ।
से काले
झरणया० चढदुगदि०
झरणण ० झत्यि य
बेद० णामा० जह० झखु० तिरादि०
अवगदवे०
कस्स ० ? अदा ० मजुस०
परियसमा ० मणिकिम० पज़सशिवत्तीए
यिव्वसमास्य ० जह० झरु० वह्ट० ।
झाउ०-गोद्०
मयपज० वे०-गोद० जह० अखणु० कस्स ?
छेदो ० असिमुह ०
परिवद्०
झणण ० रह ०
घादि०'४ जह० अखु० कस्स० ? ओचं
अओपिभंगो ।
अरणशु०
अखु ० कस्स० ?
झखणु० ? ससमाए
करमाखं खिरयोघ भंगो ।
बय्यप्फदि-सियोदाण्थं थे ओघ ।
एुग० उक्छ०
-खियोद० एवं सब्बे पजता बादरपुदणि०
अखु० जह० अंतोत ।
घादि०'४ उक्क० ओचं ।
जहयसुद्ध ०
छावट्टि० ।
एवं संजद-सामाइ०-छेद्ोव० | परिहार०
पुम्बकोढ़ी दे० । अथवा
उक्क० जह० एग०,
संअदासंजदास । चक्खु० तसपखजसमंगो ।
चुरिसभंगो । झाट्ठारा० ओधघमंगों । सबरि
जह ० अखु० अह० उद्ा० एन०के स्थानमें कहीं कहीं परिकद० घाठ भरी उपलब्ध होता दे ।ला०
उवरिसक्ते (गे) बेज्या'
सरीरपजतीहि गाइदि
अत्थि य
बेद० गामगढ़ि (? ) आओ ।
सेस मे (अ) खुदिसमभंगों ।
सेकाल (ले)
अशु० (झणयाद०) खदुगदि ०
अत्थि य
बेद० खामा० तिगदि?
झवगदे०
क० ? मखुख ०मज्मसिमपरि० जह० वह ० गोद्०मशपज्वे गोद० ज० अखु० [कि० ?]
छेदो विद्वावणा] मिमुहपरिपद्० *अरु ० (अणशद्०) शेरह०घादि०४ ओर ।ओचजिमंगो ओजिमंगो (?) ।अखु० (भ्रण्ल०)अणु [कर ]अखु० क० ! अलदा४ सत्तमाएं
कम्माबां रक्त० खिरयोघमंगों ।वदफ (ति) शियोदाणं थ श्रोघ पढ़ा ।
ए० [उिक्क०]शियोद० । एदे सब्ये पज्ता बाद्रपुढथि०
असु० उ० ज० झंतोघादि ०४ औओज |जहयय (यु) झा»छाव टू [सागरोब] माल ।एवं संज्दा । सामाह० छेदोव० परिहार*
पुम्वकोडीदे० । परिद्ार० अथवाडउ० णए्०संजदासंखदा |पुरिसिमंगो । सयबरिज० पृ०श्, साथ प्रतिमें थ बह पाड शागे सी प्राय: इसी रूपये उफ्लब्य होसा है । ९. ता« ग्रतिमे परिवद्»
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