नई कहानियाँ | Nai Kahaniyan
श्रेणी : कहानियाँ / Stories

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
8 MB
कुल पष्ठ :
142
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)| ९लगी । और अपने अन्याय को न्याय कहकर खोटा सिंक्का
व्बलाने लगी ।लेकिन न्याय की बानी भी कहीं दबती है। सत्य के बोल तो
हवा में गूंजते हैं, सासों में भरे हैं । गाँधी मरकर भी बोलता है ।
पत्थर का ठाकुर बनकर भी बह चुप नहीं रद्दा । इसने दुनिया में
कहा कि तुम्हारे रंगबिरंगपन पर में नहीं रीभंगा। तुम्हारी यह
रंगबिरंगी छटा घोखा है, भूठ है, अन्याय है ।_ तुम मुझे तो पत्थर
बना सकती हो पर मेरे न्याय और सत्य को पत्थर नहीं बना
सकती । धह्द तो मेरी पत्थर की मूरत में से भी बोलेगान्याय को अन्याय से तो कभी जीता ही नहीं जा सकता ।
न्याय को जीतने बाला एक है--प्रेम । उसके आगे दुनिया के सब
रंग फीके पड़ जाते हैं । प्रेम का रंग ही पक्का है बाकी सब
रंग कच्चे ।रंगबिरंगी दुनिया प्रेम के रंग गाँधी पर अपना रंग न चढ़ा
सकी । राम करे जेसे गाँघी जिया, बेसे सब जिरें ।
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