नई कहानियाँ | Nai Kahaniyan

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Nai Kahaniyan  by अशान्त त्रिपाठी -Ashant Tripathi

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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| ९ लगी । और अपने अन्याय को न्याय कहकर खोटा सिंक्का व्बलाने लगी । लेकिन न्याय की बानी भी कहीं दबती है। सत्य के बोल तो हवा में गूंजते हैं, सासों में भरे हैं । गाँधी मरकर भी बोलता है । पत्थर का ठाकुर बनकर भी बह चुप नहीं रद्दा । इसने दुनिया में कहा कि तुम्हारे रंगबिरंगपन पर में नहीं रीभंगा। तुम्हारी यह रंगबिरंगी छटा घोखा है, भूठ है, अन्याय है ।_ तुम मुझे तो पत्थर बना सकती हो पर मेरे न्याय और सत्य को पत्थर नहीं बना सकती । धह्द तो मेरी पत्थर की मूरत में से भी बोलेगा न्याय को अन्याय से तो कभी जीता ही नहीं जा सकता । न्याय को जीतने बाला एक है--प्रेम । उसके आगे दुनिया के सब रंग फीके पड़ जाते हैं । प्रेम का रंग ही पक्का है बाकी सब रंग कच्चे । रंगबिरंगी दुनिया प्रेम के रंग गाँधी पर अपना रंग न चढ़ा सकी । राम करे जेसे गाँघी जिया, बेसे सब जिरें ।




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