सूर साहित्य का सांस्कृतिक अध्ययन | Sur Sahitya Ka Sanskritik Adhyayan

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Book Image : सूर साहित्य का सांस्कृतिक अध्ययन  - Sur Sahitya Ka Sanskritik Adhyayan
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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रद हूंपनास--द्ुम-गन-मध्य पल्ास-मंजरी, उदित श्रगिनि की नाइं5* |पीपर--्रनुदिन श्रति उत्पात कहाँ लगि, दीजे पीपर को बन दाहिन 3 |बदरी--ऊद़ि घो री कुमुदिनि, कली कट, कद्टि चदरी करवीर 3९ |बट--कदि थो कंद, कब बकुल बट चंपक दाल तमाल5 5 |मलय--जद्यपि मलय-बृच्छ तड काटे कर कुठार पकरे5४ |सखिवार--पग न इत उत धरन पावत उरकि मोइ सिवार3* |सेंवार--सुभट मन मकर श्ररु केस सेंवार ज्यों धनुष मछ चर्म कूरम बनाइ 3९ |लवंगलता--फूते चंपक चमेलि फूलि लबंगलता वेलि सरस रसही फूल डोल5* |ऊ. फल--अंब (बुआ, रसाल); ककरी, खीरा; दाड़िम, निवुआ, श्रीफल आदि।अँब--तहाँ मौरे अंब्र फूले निबुश्रा जहँ सदा फर फूले सरस रसहदी फूल डोल5< |झंबुआ--मौरे अबुआ श्ररु दम बेली मघुकर परिमल भूले5१ |रसाल--नव बलली सुंदर नव नव तमाल | नव कमल महा नव नव रसाल** |ककरी--जब ले यूर कदति है उपजी सब ककरी करुई** |खीरा--बाहर सिलत कपट भीर यौँ ज्यों खीरा की रीति** |दाड़िम--चंपक बरन चरन कर कमलनि दाड़िम दसन लरीष5 |निवुआआ--तहाँ मौरे झंब फूले निवुआ जहँ सदाफर फूले सरस रसहदी फूल डोलर्ड४श्रीफल--जबहि सरोंज घरव्यी श्रीफल पर तब जसुमति गई श्राइ* |ए.. फूल--झंबुज(--इंदीवर, कंज, कमल, कुसेसय, जलज, जलजात, तामरस, बारिज, राजिव, राजीव, सतदल, सरोज), श्भतिसी, कदंब, कनिारी, कनीर, कनेल,; करना, कुंद, कुमुद, कुमुद्नि, कूजा, केतकि या केतकी, केवरा, चंपक,; चमे लि३०, सा५ र८रे | ३१, सा० १४८८३ ३२, सा० १०६१ | ३३, सा० १०8१ | रे, सा० १-११७ | इे५, सा« १-६१ | ३६, सा० ४१८३ | ३७, सा० २४१७ | ३८, सा० २६१७ | ३६, सा० र८श४ | ४०. सा०् रद४६ | ४१. सां० देर््६। २, सा० ०४९ | ४३, सा० £-६३ |४४. सा० २६१७ | ५, सा० ६८२ |




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