नटो तो कहो मत 1 | Nato To Kaho Mat 1
श्रेणी : साहित्य / Literature

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
1 MB
कुल पष्ठ :
57
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)कर दीं नकद ब् गा
[ २ 1
[क' बुद्धिमान श्रौर कौन होगा ? श्राप ही उस शिव-मन्दिर पर भाें
5गा गये तो दुगना जेबर ले लुगा अर यदि बिन ठगाये लौटे ९
जेवर आपका होगा ।”'
पुरोहित ने सरदार की दातें मान ली श्ौर बहु एक ऊंट पर सब।
'र शिव-स्दिर को रवाना श्ा। सार्दिर के पास पहुँचा तो सा
री ठग ने प्रावाज दी ।. पुरोहित से ऊँट को श्रलग बिंठा दिए
' स्ववं ठग के पास जा बेठा । जेवर देखकर ठग ने सोचा--'शझा
डा शिकार फँसा है । बड़े प्रम से बहु पुरोहित के साथ बातें करः
१ सन्ध्या होते ही उसने पुरोहित को झपना नियस सुनाया
हित ने उत्तर दिया--मुक्ते रात में दिखाई सहीं पड़ता, इसलि
रात भर यहीं ठहरूंगा । ठग ने कहा--एक शत पर तुम य।
7सकते हो । मै जो बात कहूं, उसे तुम सुनी श्रौर यदि लुम <
वो कि 'यहू भी कोई होने की बात है !' तो सै तुम्हारा सब कु
लू ।” पुरोहित ने कहा--“वुम्हारी बातें तो मुक्त स्वीकार है ५
। भी यह दाल होगी कि मैं भी एक बात कहूँ सौर थदि सुनकर तुम
[कि 'यहू सी कोई होने की बात है !” तो मै तुम्हारे पास मत्दिर
कुछ है, सब ले जाऊँ ।” ठग ने शर्त मंजूर कर ली ।
ठग ने बात कहना शुरू किया--“एक बार मैंने ५०० रुपयो में ए
था कट खरीदा झौर उस पर सवार होकर ससुराल गया । जब
| पहुँचा, मेरे ससुर, साले श्रौर ससुराल को शियाँ सब खेत काटने
थे। कटे गेहूं का ढेर खेत के बीच से लगा हुआ था । मै पढुँ
उन लोगों ने काम बन्द कर दिया, मेरे पास झा बेठे श्रोर बातें क
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