संमतितर्क - प्रकरनम संवत १९८५ भाग ४ | Sammati Tark Parakaranam Samvat 1985 Vol Iv

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
11 MB
कुल पष्ठ :
197
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)श्शुविद्या
ऋ गाथाव्यास्था ।
प्बंभूतलरवथद्वानरूपस्य सम्यग्द्देनस्प सस्यण्कामरूपस्वसेय
डलि च्णनस ।
'३३ गाथाव्याख्या ।
सम्यग्शनि दर्शनत्वस्य नियततथा देने
बरियसया शम्यन्दसेन शिदिरश्तसरूपसेव इति फलिताजिधानम।
चेक गःथाव्याख्या ।
खूओोक्त॑ सायपयंचसितत्व शब्द॒दाः स्पृशातां केपांचिदाचायाणां
गर्चिज्वतया सम्यन्वादिस्वाभावतश्रतिपादनम् 1
डण गायाश्यास्या ।
सिद्धान्तिना केवलस्य प्यवसितत्वघ्रद्शनम्।
३६ गाभाव्यास्या ।सिध्यत्समये केवलस्य विनादावद् उत्पादस्यापि भप्रद्शोनम् अपयेवसितत्व-
विपयकसभोकेरपेश्सविदोजिण समर्थन थ ।3७-३८ गाथाव्यासया 1
स्वरुप-लक्षणाभ्यां जीव-केवलयोमैदे सत्यपि के तयोरेकत्वसित्यस्याः
केपांचिदादाज्ाया उल्लेख: ।
झ५, माधाव्यस्या ।
हायुक्तामासक्ां मिरसितुसुपक्तमः ।
श्व० गथाव्यास््या |भनेकान्तात्सकेकरूपत्वेन साध्येन सरवस्य हेतोव्योपिं
अ्रसाधघयितु दष्टास्तोपन्यासः 1४१ गायाब्याख्या ।
शशा्तमुद्दीतव्याते: खरवददेतोदोसन्तिके केवले उपनबनमू ।
४२ गाथाध्यास्या ।
जौव-तत्प्यायगत घामाणिक व्यवहारमाशित्य द्रव्य-पयोययोरे-
कान्तनेदनिराकरणम 1
४३ भायाव्यास्थ्या ।
आात्मदव्यस्य स्वामाविकेवेभाधिकेश पयायेः
कथेचिदेकानेकत्वप्रददोनमू ।इन
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