विज्ञान पत्रिका | Vigyan Patrika

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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परमें वसा का सेवन बहुत कम मात्रा में होता है। इस कारण सीरम में कोलेस्टेरॉल का स्तर कम रहता है, जिसके परिणामस्वरूप हृदय रोग के विकसित होने तथा स्तन एवं बड़ी आँत के कैंसर की चपेट में आने का खतरा टला रहता है।शाकाहार में रेशा प्रचुर मात्रा में उपलब्ध होता है। चैंकि इसका पाचन नहीं होता है अतः इससे मल की मात्रा बढ़ जाती है, वह मुलायम रहता है जिससे उसकी गतिशीलता आसान हो जाती है। आहार में रेशा अधिक मात्रा में उपलब्ध होने की स्थिति में बड़ी औँत में होने वाले रोग, अपेंडीसाइटिस, हार्निया, पाइल्‍स जैसे रोग और बड़ी औआँत एवं मलाशय के कैंसर के खतरे कम हो जाते हैं।आहार विशेषज्ञ मैक कैरिसन का कहना है कि सभी दृष्टिकोण से उपयुक्त एक आहार में दूध, दूध के उत्पाद, कोई एक साबुत अनाज अथवा कई अनाजों पृष्ठ 7 का हीोष ........प्रौद्योगिकी और सूचना प्रौद्योगिकी का समन्वय ही बायोविलेज की मूल संकल्पना है|इक्कीसवीं सदी को जैव प्रौद्योगिकी तथा सूचना प्रौद्योगिकी की नई सदी घोषित किया गया है। जैव प्रौद्योगिकी की महती सम्भावनाएँ बताई जा रही हैं । कृषि के क्षेत्र में यद्यपि आनुवंशिक रीति से परिवर्द्धित फसलों की विशेष चर्चा है किन्तु जैव प्रौद्योगिकी केवल आनुवंशिक परिवर्तन तक सीमित नहीं है। इसमें जैव पेस्टीसाइड, जैव उर्वरक, औषधीय पौधे तथा ऊतक संवर्धन सम्मिलित हैं|अनुमान है कि जीन स्थानान्तरण के द्वारा न केवल उत्पादकता में अतिरिक्त वृद्धि की जा सकेगी अपितु उगाई जाने वाली फसलों की गुणवत्ता में भी सुधार लाया जा सकेगा | इस गुणवत्ता के क्षेत्र में फसलों में विटामिन ए वाला जीन डालकर “सुनहरा चावल' विकसित किया जा चुका है जिसको खाने से आम जनता में विटामिन ए की कमी दूर की जा सकेगी | इसी तरह लोह न्यूनता को दूर करने के प्रयास विचाराधीन हैं।अभी तक जीन स्थानान्तरण के फलस्वरूप धान, कपास तथा सोयाबीन उत्पादन में पर्याप्त वृद्धि लाई जा सकी है। किन्तु गेहूँ में जैव प्रौद्योगिकी अभीका मिश्रण, हरी प्तेदार सब्जियाँ और फल जैसे खाद्य सम्मिलित हैं। ये सुरक्षा प्रदान करने वाले खाद्य हैं जिनसे शरीर को विभिन्‍न संक्रमणों और रोगों से सुरक्षा मिलती है। शाकाहार से न केवल शरीर स्वस्थ रहता है, बल्कि व्यक्ति की कार्य दक्षता भी बेहतर हो जातीहै।इस प्रकार शाकाहार वैज्ञानिक तौर पर एक सम्पूर्ण आहार है, जो रोग ग्रस्त जन्तुओं से प्राप्त होने वाले हानिकारक जीवाणु और उनसे होने वाली विषाक्तता से सर्वथा मुक्त होता है। शाकाहार मनुष्य के शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण से एक सर्वोत्तमआहार है। ं वरिष्ठ अनुसंधान अधिकारी प्रकाह्मान एवं सूचना प्रभाग भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद्‌ असारी नगर, नई दिल्‍ली-110 029तक कारगर सिद्ध नहीं हो पाई | आज जहाँ एक ओर आनुवंशिक रूप से परिवर्तित फसलों से प्राप्त खाद्याननों को व्यवह्त करने में आम सहमति नहीं बन पा रही, वहीं जीन स्थानान्तरण से सम्भावित खतरों पर भी काफी विचार-विमर्श चल रहा है। जब किसी भिन्‍न जीनस से या भिन्न किंगडम से जीन का स्थानान्तरण किया जावेगा ता सम्भावना है कि ऐसे नए रोग जनम लें जिन पर काबू पाना मुश्किल होजाए।सूचना प्रौद्योगिकी द्वारा मौसम के विषय में पूर्व जानकारी देकर ओलावृष्टि, अंधड़ आदि से किसानों को आगाह करना सुगम हो जावेगा। उन्हें कंप्यूटर तथा इंटरनेट से विश्व बाजार का भी पता चल सकेगा। वे अपनी उपज का उचित मूल्य प्राप्त करके आत्मनिर्भर हो सकेंगे । खाद्याननों के अलावा शाकभाजी उत्पादन तथा फूलों के उत्पादन में भी काफी विकास हुए हैं। आहार की गुणवत्ता पर भी बल दिया जा रहा है। सचमुचइक्कीसवीं सदी में कुषि का क्षेत्र बहुव्यापक होगा | प्रधानमत्री विज्ञान परिंषद प्रयाग महर्षि दयानन्द मार्ग, इलाहाबाद-211 002अप्रैल 2002विज्ञान अल 2002 विज्ञान __................... 14




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