शहर : अब भी संभावना है | Shahar - Ab Bhi Sambhavana Hai

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Shahar - Ab Bhi Sambhavana Hai by अशोक वाजपेयी - Ashok Vajpeyi

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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क्या तब तुम पहली बार पहचानोगी ं मेरे चेहरे में छूपा अपना ही ईश्वरदूषित चेहरा ! माँ, लौटकर जब आऊंगा क्या लाऊँगा ? थक ८ / शहर अब भी सम्भावना है




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