औरंगजेवनामा | Aurangajevnama

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Aurangajevnama   by खेमराज श्री कृष्णदास - Khemraj Shri Krishnadasमुंशी देवीप्रसाद मुंसिफ़ -Munshi Deviprasad Munsif

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खेमराज श्री कृष्णदास - Khemraj Shri Krishnadas

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मुंशी देवीप्रसाद मुंसिफ़ -Munshi Deviprasad Munsif

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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कल,ऑन» दनयगर' रद क खण्ड १९-आरंगजेव अहनदुनयगरस. ६ ११सस्तीन जो पह़िनेहुए थे उतारकर उसकों इनायत वी आए बहर्मंदखां को नखशीउलमुल्क अदारफलां मातमसे उठाकर हृजर में छाया |झाव्वाल ( आश्विनवदि ६ । २० सितम्नर ) को साहजाद साअज्जुदास की चादी की मजदिस चुई सिदअत बाठावंदसमत, डेटलास का. जवाहर, सोने की जीन का घोड़ा, चांदी के सान का हाथी, थाहजादे को और ६७ हजार का जवाहर सेयदूठनिसावेगम को इनायत हुआ |शाम को दादआउमवहादुर और दूसरे शाहजादें मोअज्जुद्ीन को दूल्हा ननाकर चरागों की रोशनी में जो रस्ते के दोनों तफे होरदी थी. अपने घर ते चाददाही दौल्तखाने में छाये, हजरत ने अपने हाय से २ मोतियों का सिहरा उसके दिर पर बांधा यह शादी जयुलनिसाविगंम के इन्तजाम से हुईं, आधी रात को अमठ में दुरुदन का डोढा दुल्हा के घर पहुंचा ।२१ ( आश्चिनवदि ७ |! २१ सितम्बर ; को गाजीउद्दीनखां बहादुर खिलअत खासा और ५ घोडों की इनायत पाकर राहेरी का किला फतह करने को रुखसत हुआ उसके ब्रेंटे कमरुददीनखां को तलवार और दुसरे तइनातियों को खिल्अत इनायत डूबे ।जीकाद ( आश्विनसुद्ि ११1९, अक्तूबर ) को सौ तुरकी और पहाडी घोड़े मदद के तौर पर आजमदाह के पास मजे गये ।फखरुद्दी को सोयेंको थानेदार अवदुर्हादीखां को चाकने का और नाम- दारखां के बेटे मरहमतखां को गरवे का थानेदार बनाकर वादशाहने भेजा ।२६ ( कार्तिकवदि १९1२६ अक्तूबर ) को बखशीउलमुलस्क रुइछाहखां खि्अत जमधघर और घोड़ा पाकर फसादियोंको सजादेने के लिये गया, का- समखां, मोहम्मदवदीअवलखी इल्हासुछाइखां दाहमाउमका नोकर अवदुर- रहमान ? हजार सरादह्द से दृयातअवदाली जो. कंधार से दजर में पहुँचा था१ कलूकतते की प्रति में २ ( भादों सुद १61८ सितम्बर ) । २.कलूकत्ते की प्रति में जीनठुल निय्यावेगमस । ३ कलकत्ते की प्रति में सोया । ४ कलूकत्ते की प्रति में गरदह्दानमूना | -




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