श्री वर्धमान महावीर भाग - 3 | Shri Vardhaman Mahaveer Bhag - 3

55/10 Ratings. 1 Review(s) अपना Review जोड़ें |
Book Image : श्री वर्धमान महावीर भाग - 3  - Shri Vardhaman Mahaveer Bhag - 3
[adinserter block="2"]

लेखक के बारे में अधिक जानकारी :

No Information available about दिगम्बर जैन - Digambar Jain

Add Infomation AboutDigambar Jain

पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

(Click to expand)
एन प्रकार युद्धों से छुटकारा नहीं होता । यदि केंसरे जरमनी को हरा '. दिया तो उससे भी भयककुर दिटलर उत्पन्न होजाता है । युद्ध से श्र. नष्ट हो सकते हैं परन्तु शत्रुता न्ट नहीं होती ।._ ५ कुछ लोगों का खयाल है कि ऐटामिक बम्बों तथा दैडरोजन .बस्बों के मय से शान्ति को स्थापना हो सकती है। एक देडरोजन बम्ब पर 5 2000000000* ब्र्थात (5 दे (नर पशि6 है४. 100/5) लगभग १० अरब रुपया खर्चे होता हे श्र फिर भी रूस के प्रसिद्ध विचांरक 0. 701500% के शब्दों में “आगसे झाग को नहीं बु्ांया जः सकता” । प्रा० है 8<र-हांफडलंघ भी इस बात की पुष्टि फरते हुए कहतें हैं “हिंस्ग को हिंसा से नहीं मिंटांया जा सकता” * । अमेरिका के वंज्ञानिक 07. त8त05९ हर, ममण०6 के कथनानुसार -”जा भयानक हथियारों से दूसरों कोमिटाना चाहते हैं, वे अपनी कब्र अपने हाथों से खोकदरहें हैं ।विश्व के सर्वेमान्‍्य राजनीतिज्ञ भारत के प्रधानमन्त्री पं८ नेहरुके शब्दों में इस समय सारा संसार बड़ी विषम परिस्थिति से गुस्तर _रहा हे श्रीर इस से बचाव का केवल एकमात्र उपाय श्हिंसा है”*।.बरूट तंदाटतार्त छदवाइ8त बरतें हुए! छिध।ह+, रिणाठ्मंणड्ट घट वर्धा ण साल कट प्राधऐ हटा 8 फ़0ा86. दि . ० हि, छत ए गकॉडडड धह. प्रेहडकि00 दरिंड ०01 की हह8पॉड एक ए 0पिफी: ऊताडदा' दव पडा प्राफा0 ” ्िप्प्रास्ट 0१ ह.0एं5 सिध्टिटश, फू. 11. व हु थएट४ हि 21001: [07140 एटसंटणा, (1950) फ, 785 दुणठाघण क्िधतेट छणाट्पंण (0४६, तह 7वते8 (16-8-90) छ. 75 एक 80 ?९8८८ 9 0. 15105, संघ हप' 5 88592. १0०. (0८ छृग0116 88 तह ८९ पंए8४, पफा056 भा 81९ जाए (6 5८ फाट80०0४ लि (96 ॥ठं01घट्, शाएड1 9९ छाष्कुबा€ पे ंप 1लपाए 10 ८०८७1 8घंट्रातड 10 पट 08787, सण्ताबण हित्संट्ज (1950) हि, 788, ७. ८ फ0110 ४ एबं एपा०एड्ूफ 8 एटा ८पंपंट81 9८5८, बट छह 0८15 81९ एणं5 घर 2[051. 00८ 800110८71, धाश्ट्त एप (प€. 'ाइ०त देटावशिकटिशड ध्ाथप्ूण्ण्यन ज च्या, ए6४ + हैपरि53 1,048 0 50176 [९ 010016005, जासाघपड था पफितट, चिट फट (5 छा] 20; 1954.) ए 1. .रच ं ःनदी) दा कई हल 5




User Reviews

No Reviews | Add Yours...

Only Logged in Users Can Post Reviews, Login Now