दयानन्द की विद्वता | Dayanand ki Viduta

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Dayanand ki Viduta by कालूराम शास्त्री - Kaluram Shastri

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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( ४ ) चेलोक्यकदिख्यातगुणं त्व॑ विप॑जनधपिष्यसि । साचक्षचंविशिष्ट वे तत सतत्कूतं सया ॥ ४ ॥# व्यत्यासस्तुकुतोयसमा-त्वयासाचाचते शुभे । तस्मात्सान्नासाणश ष्ठ सातातेजनयिष्यति ॥६ूं॥ सझचियं तथकससिं त्वंभट्री जनयिष्यसि । नहिचतत्कूतंसाध . सातृस्नेहेनभाविनि ॥ 9 ॥ सामत्वाशोकसंतझा परपातवरवशिनी । भूसी सत्य॑वती राजं-श्छिन्ञेवसचिरालता ॥ ८ 0 अतिलभ्यचसा संज्ञां शिरसाय शिपत्थच । उचाच -भोया .सर्तार गाधेयो भार्गचष भमू प॥ असादयन्त्यां भाययासयि. न्रहाविदास्वर ! असादंकरु विम्रद नसेस्यात्क्षघिय: सुतः ॥९०॥ कामसंससो य्रकर्मावि, पौच्ोभवितुमहति ।..... नतुमेस्यात्स तो ब्र घान्ते षसे दो यतावर: ॥ १९ ॥ .. सर्वसरसि्त्वितिहो वाचस्वां. भायंससहातपा: ततृ: सा जनयासास- जसदर्निं सःतंश भभ, ॥१२॥




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