नाटकों के देश में | Naatakon Ke Desh Men

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Naatakon Ke Desh Men by मस्तराम कपूर - Mastram Kapoor

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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आओ दोस्त बनायें 0 नीरा मौसी प्यारे तुम ठीक कहते हो । यहां काफी धृप है । छाता तानकर . . . कितनी गरमी है । छैल-छबीला पुराने इंग्लैंड के सर्दी-कोहरे और बर्फ-पानी से तो यह अच्छा ही है । तुम्हाग क्या खयाल है ? नीरा मौसी मुझे कोई शिकायत नहीं । में तो खुश ही हूं । बस पसीना आ रहा है। इतनी सी वात है। छैल-छबीला पसीना आना तुम्हारे लिए अच्छा है। आगे बढ़ कर उसके हाथों को थपधपाता हैं। टससे शरीर खुल जाता है । बड़ एक ट्रंट पर बैठता है । ऊह्द . . . तुम ठीक कहती हो । यहां तो बहुत गरमी है | वह रुयाल से. चेहरा पॉछता है । छेल-छबीला हां नाग. अब जब हम आस्ट्रेलिया आ गये हैं । खड़ा होकर अपने आरीर को सीधा करता दे में तुमसे एएक बात कहना चाहता हूं । नीरा मौसी वाला . . . छैल-छबीला पूटनों के बल बैठकर और उरका हाथ अपने हाथ में लेकर . . ओ नीरा मेरी प्यारी नीग । तुम कितनी सुंदर हो | बहुत इंतजार हो चुका । ऊच हमें शादी कर लेनी चाहिए । नीरा मौसी तुम वहुत अच्छे हो फैल छवीले | लेकिन शादी की अंगूठी कहां से आयेगी? छेल-छवीला अंगूठी? नीरा मौसी हां अगंठी । अंगूठी के लिए क्या करें? छैल-छबीला आर . . . . छोड़ो भी | मैं नहीं जानना । कया तुम्हारे यास कोई अंगुली नहीं हैं? नीरा मौसी नहीं | मेरे पास तो नहीं है । छैल-छबीला | उठने हुए फिर नो बात खत्म हुई । क्या चढदकिस्म्ती है । क्या तुम अंगृठी की शर्त छोड़ नहीं सकती? नीरा मौसी एसी वात मत करो प्यारे . .




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