इक्कीस बांग्ला कहानियाँ | Ikkees Bangla Kahaniyan

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Ikkees Bangla Kahaniyan by देवलीना - Devleena

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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माखिरी बात॑ 5 “हुंसता क्यों है?” सआपकी वात सुनकर हस रहा हूं । लाठी-वर्छी तो हम पकड़ते ही नहीं हैं ।” “तो फिर रोकोगे कंसे ?” सउनके आने पर हम अपनी पीठ बिछा देंगे । कहेंगे, लो, सारों लाठी । छाती आगे कर देंगे। चलागी बर्छी हम पर । हमारा खून बहेगा । मिट्टी लाल हो सठेगी । हम मरेंगे । तब उन लोगों को अवल आएगी । छाती दुख से टनटनाएगी । आंखों में आँसू भर आएंगे! भगवान उनमें ज्ञान जगाएगा । वे जलाकर लौट जाएंगे नाएव हा-हा कर हुस पडा । बोला, यही है चुम्हहरी अक्त ?”” बूढ़ा ताज्जुब मे पढ़ गया । वह बिल्कुल भी नहीं सहमा । उसके दत-विहीन घेहरे पर वचकानी हसी खिल उठी । बोला, “होता है । ऐसा ही होता है । मेरे मन ने भगवान से पूछा । भगवान सब समझ गये । आप लोगों का दिल भगवान से कुछ नहीं पृछता न । नहीं तो आप भी मेरी बात समझ सकते 1” जैसा देवता, वंसी ही उसकी देवी । बूढे की बूढ़ी मानी सनके की सनकी थी । सारी वात सुनकर बहू भी चिंता मे पड़ गयी । बूढ़े की तरह उसे भी साहू के नाएब के लिए चिता हो रही थी । “ए बूढ़े, यह तो बिलकुल ही सीधी सी बात है । कया मालूम वे लोग समभकते क्यो नहीं ? ”' यही तो वात है बुढ़िया 1” अब कया होगा ? तुम कया करोगे ?” गमैं ?” बहुत सोचकर बूढ़ा बोला । हा बात कुछ तो बनी है ।'' गवया है “मैं मरूगा । गप्मरोगे 7” हां, में मरूगा । अगर मैं मर गया तब उन लोगो ' के मन में दुख होगा । भगवान उन्हें बकल देंगे । तब हमारी बात वे ठीक-ठीक समक पाएंगे 7” बूढ़ी थोड़ी देर तक सोचती रही । सोचकर खुद हो उठी । हंसकर सिर हिलाकर बोली-- “तुम ठीक कह रहें हो ।” “ठीक कह रहा हूं न 7” बूढे ने हुंसकर बुढ़िया की त्तरफ देखा । “हां, चुम ऐसा ही करो । मरो । मर कर उन लोगों को समभा दो ।” बाहर से रतनलाल ने पुकारा--“चाचा” “भा बेंटा था ।” बूढ़े लाल मोहन का चेहरा खुशी से भर गया । रतन लाल इंसता हुआ आकर खड़ा हुआ । बोला, “सब लोग बाहर खड़े हैं




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