नानेश वाणी अनुभूति के क्षण भाग - 2 | Nanesh Vani Anubuti Ke Kshan Bhag - 2

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Nanesh Vani Anubuti Ke Kshan Bhag - 2 by आचार्य श्री नानेश - Acharya Shri Nanesh

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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अध्याय चार आत्म-समीक्षण के नव सूत्र सूत्र : री मैं विज्ञाता हू, दृष्टा हू मुझे सोचना है कि मुझे किन पर श्रद्धा रखनी है और कौनसे सिद्धान्त अपनाने हैं ? मेरी दृष्टि लक्ष्याभिमुखी होते ही जान लेगी कि मैं सत्य श्रद्धा एव श्रेष्ठ सिद्धान्तो से कितना दूर हू ? मैं सुदेव, सुगुरु एव सुधर्म पर अविचल श्रद्धा रखूगा, श्रावकत्व एव साधुत्व के पालन मे संत्सिद्धान्तो के आधार पर अपना समस्त आचरण ढालूँगा और ज्ञान व क्रिया के सयोग से निर्विकारी बनने मे यत्नरत हो जाऊगा।




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