श्री सनातन धर्मालोक | Shri Sanatan Dharmalok
श्रेणी : धार्मिक / Religious

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
9 MB
कुल पष्ठ :
521
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)[न].जाभार्थ नितरासू श्रावश्यक है। शव 'ध्प्रिम पुप्पके लिए संरक्षक,
सहायक, प्रेरक एवं प्रचारकोंकी श्रावश्यकता दे । मिंतनी शीघ्र सद्दायता
पप्त होगी, उतना ही शीघ्र अन्थमालाका प्रकाशन दोगा। अरक,
महोदय ध्यान दें । कि पी
अमूल्य कोई भी न लेहें इस प्न्यमालामें जो भी साहाय्य या मूस्य माप्त होता दै; वद
सब धागेके पुष्पोकि प्रकाशनार्थ जमा कर लिया जाता है; उसे 'पने
कार्म्म नहीं लगाया जाता; श्रतः कोड भी महीदय इन यरन्योंको पिन
मूल्य न लें । यदि श्रधिक-सहायता कोई मददोदय न कर संक; तो
यस्थक्रा सूख्य श्ववश्य दें, 'ग्रौर इन ग्न्योंके प्रचारमें '्वर्य सहायक
व्नें। संरत्कका एफ-हज्ञार रुपया नियत है, श्ौर सहायकोंका न्यूनसे
न्यून १००) रुपया है, यह सदको स्मरण रखना चाहिये । संररक-
महोदयंका चित्र भी प्रकाशित होगा श्ौर सब प्रकाशरनों पर नाम भी ।
स्थायी आहकोंके लिए यदद सुबिधा रखी गई दै कि--वे २) जमा करा
दे, फिर उन्हें सभी पुष्प पौने मूह्म पर दिये जावेंगे। दन्दें सव
श्रकाशिते पुष्प लेने पड़ेंगे !इस पुप्पमें जिन मद्दाशयोंकि सनातनधरमं-विरुदद॒ मठकी श्रालोधित
किया हैं, उसमें कोई ईपर्या-देप कारण नहीं, किन्तु शाखका बास्तथिक
अभिप्राय-प्रदर्शन ही वहाँ मुख्य- लक्ष्य है। फिर भी यदि किसी मही-
बयका सनः-चोम हुधा हो, वो वे हमारे हृदयको जानते हुए हसें धमा
करेंगे । चिचारमे जो शुडि रह गई हो, दिद्दानु हमें उसकी सूचना
इन शब्दोकि साथ यदद भूमिका समाप्त दै ।श्रीब्यासपूर्णिमा निधेदक:--
_ इस्वार है. दग्रानायर्था सात्वी लारतात विवावगकित,
सर (0 रामदल, द्रीवाकलां, देहलीच
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