शरीर बीबी | Sharir Bibi

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Sharir Bibi by मिर्जा अजीमबेग - Mirja Ajimabeg

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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पहला परिच्छेद हमारो शरारतें ध्राज हम पाठकों को श्पनी शरारतों का कुछ खुलासा सा हाल सुनाते हैं । कुछ अधिक दिन नहीं बीत, जब हमारे पिता “यपुर में थ, तब हम सातवं दर्जे में पढ़त थे, और सरकारी गले में ठंडी सड़क पर रहते थे । इतवार का दिन था । सबेरे डके ही हमारे बैंगल पर दो-तीन दोस्त '्या पहुँचे, जिनसे ते हो गया था कि नदी के किनारे ककड़ी खाने चलेंगे । हम लोग सबेरे सबेरे बंगले से निकले । जैसे ही बाहर निकले, कोई साहब सड़क ने किनारे बेठे हुये पेशाब कर रहे थे । इसलिये सबसे पहले यह काम किया गय। कि एकदम से उनके दोनों कन्घों को पकड़ कर उन्हें ज़मीन पर बिलकुल चित लिटा दिया. श्ौर भाग कर यद्द गया, वह गया । गालियाँ तो नहीं मालूम कितनी दी थीं; किन्तु दूर स यह अवश्य देखा था, कि वे नल पर नहा रहे हैं । थोड़ा थ्ागे बढ़ तो एक साहब बाइसिकिल पर जा रहे थे । इस लिये हम उ्चक कर पीछे कील पर खड़े हो गये थे । भलेमानुस हँसने लगे। हम निराश हो कर थोड़ी देर में उतर पड़े। एक दूसरे साइब मिल । उनकी साइकिल पर जब हम खड़े हुये, तब व बहुत गुस्सा हुये । इस तरह कि हमें चपत मार कर भागना पड़ा ।.एक आर 'साइकित'




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