जीने का राज | Jine Ka Raj

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Jine Ka Raj by श्री आभा सदुमार्गी जैन

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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इधर इन्टरवेल (॥॥छाए8) का समय पूरा होते ही घटी बज उठी सभी छात्र अपना कार्य जल्दी-जल्दी पूरा करके कक्षा मे पहुच गये। अनुराग भी अपनी पढाई मे लगा। पढाई वह मनोयोग पूर्वक किया करता था। जो भी टीचर्स (680185) होमवर्क (10णा&#/00 देते वह शीघ्र ही पूरा करने के बाद ही सोता था। जब कि उसके वे धनादय दोस्त जब तब मटरगस्ती मे ही लगे रहते थे। उनका होमवर्क (40ा16५४/000 कभी भी पूरा नही होता था। स्कूल के खाली पीरियड (61100) मे भी वे लोग कोई न कोई शरारत किया करते थे। स्कूल आने के बाद थी उनका लक्ष्य पढाई नही, मौज मस्ती ज्यादा रहता था। व्यवस्थित अध्ययन न होने से वे जब तब अध्यापकों की डाट फटकार व दण्ड के पात्र बनते थे। यही कारण था कि ये सब, क्लास मे सदैव पिछडे रहते थे। और अनुराग सबसे आगे। वह जानता था कि मेरे मम्मी-पापा किस त्तरह तकलीफे झेलकर मुझे इस स्कूल मे भेज रहे हैं। वे स्वय भूखे रह जाते हैं पर मुझे व मेरी बहिन विभा को उन्होने कभी भूखे नहीं सुलाया। वे खुद फटे पुराने कपडे पहनकर ही अपना तन ढक लेते हैं वे हमारे लिए अच्छी से अच्छी ड्रेस (0655) लाने की कोशिश मे रहते हैं। अनुराग की उम्र अगी अधिक नही मात्र 14 वर्ष की थी | लेकिन अपने घर की स्थिति प माता-पिता के कष्ट को बखूबी समझने लगा था। वह चाहता था कि मैं अपने मम्मी-पापा के अरमानो को पूरा करू व इसके लिए परिपूर्ण अध्ययन होना उावश्यक है अपने इन अमीर दोस्तो के साथ अगर मैं भी मस्तिया मारने ला तो फिर. | यही कारण था कि इस प्रकार के रईसी सर्किल एंट मे रहकर भी वह अपने आप मे सादगी पूर्ण ढग से जीता था। और दि लग दोस्त ऐसे थे कि अनुराग के गरीब होने पर भी उससे वे हर समव खा मित्रता कायम रखते थे क्योकि अनुराग पढाई आदि हर कार्य मे हा उसी के सहारे से वे भी कुछ-कुछ अध्ययन करके परीक्षा में शा तडिगए 80 पा लेते थे। अनुराग से सहयोग पाते हुए लि का शी मिलता तो उसे चिढाने मे उसकी गरीबी हालत पर व्यग बी र्‌ शी गकीा अपमान करने मे नहीं चूकते थे। फिर भी अनुराग सदैव उनसे कल उनका भला ही किया करता था। पढाई चल रही थी, और हि शा बढती जा रही थी। एक के बाद एक क्लास मे सफलता * सस्ते हुए ये सभी साथी 12वीं क्लास मे पहुंच गए। जे (21)




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