विविध आचार्यों द्वारा व्यंजना - रक्षार्थ प्रयुक्त युक्तियों का आलोचनात्मक अध्ययन | Vividh Acharyon Dwara Vyanjana - Raksharth Prayukt Yuktiyon Ka Aalochanatmak Adhyayan
श्रेणी : साहित्य / Literature

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
46 MB
कुल पष्ठ :
297
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)3'मन्य प्रस्थानों मैं सक्षणा का अस्तित्व सिद्ध हो. जाने पर
काव्यशास्त्र में लक्षणा का जो स्वस्प है. उसे यहाँ पर प्रम्तुत किया जारहा हू नसक्षणा शब्द लक्ष घात - शुच प्रत्यय - फिलियां ठाप करने पर
बनता हैं |वाशिघ्ठ ध्वनिवाबी जाचार्य अमध्विवशप्त के पनुसार * -. मुख्व्यार्थ
ब्राधावि सकारथियों की समपैक्षा से अर्थ की प्रतोति करानें वाली शक्ति
सक्षणा हैं. -... *.. प॒स्यार्थ बाधाबिसडकार्यपैक्षा ... प्रतति्तासनशॉक्तिलक्षणा
शक्ति । सेमध्विनिवगप्त से पहले यवि . हम पलकार-शास्त्र में लक्षणा को
स्््धाति बैख़ना चाहें ता वहां पी सक्षणा के स्पष्ट संकेत मिलते हैं. ।
प्बम्यट में कक के प्रसंग में ग़णवुत्ति का उल्लेख किया हैं. । “ पाचार्य
वाम्न ताँ काक्ति को साटृश्यसम्बन्घस्पा सक्षणा हीं मानते है. ।माचार्य मम्पट मे काव्य-प्रकाश मप्ें सलक्षणा का सिस्पण इस प्रकार
किया हैँ -१ . मुस्प्यार्थ्नाथ तथोंगे रूदितोडथ प्रयोननात
'मन्योडर्थों सक्ष्यते यत सा सक्षणारोपिता क्रिया *.. से
4. -.... लक्षणाशब्वश्च लक्षघातोरचिप्रत्यये स्खियाटापि सिद्धयति-न्यायकश ८
पु. 99
2... ध्व८ लौचन, प्र. 3. पृ 9६8
ऊ ...... शब्वनामधिधानमणिधा व्यापारों स॒ख्वय्यों ग़णवात्तिश्च ।
काव्यालकारस्ारस्ह्म >.. अ. जज.था, साइश्याल्लन्षणा वजाक्ति: |
हर है न स था सदर भर व ला सका नी से स्ि
5. काव्य प्रकाश. - डिंतीय उल्लास -.. पृद व
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