नागरी प्रचारिणी पत्रिका | Nagari Pracharini Patrika

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Book Image : नागरी प्रचारिणी पत्रिका  - Nagari Pracharini Patrika
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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वसुदेबहिंडी १७१भाषा में लिखे जान पढ़ते हैं । ऐसा होते हुए प्रसंगानुसार अलंकारमय तथा समास- प्रचुर भाषा का भी प्रयोग मिलता है । यह प्रधानतः गद्य प्रथ हैः, परंतु बीच बीच में पद्य भी झ्ाए हैं ।“बसुदेवदिंडी' में प्रयुक्त कितने दी शब्द किसी भी कोश में नहीं मिलते । उसमें शब्दों के ऐसे प्राचीन रूप मिलते हैं जो पिछले काल के प्राकृत प्रंथों में भी भाग्य से ही दिखलाई पड़ते हैं ।इस प्रथ का सबसे श्रधिक मह्व यह है किं इससे गुणाढ्य की ब्ृहकथा की शैली रादि का पता चलता है।




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