नाभादास कृत भक्तमाल एक अध्ययन | Nabhadas Krit Bhaktamal Ek Adhyayan
श्रेणी : साहित्य / Literature

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Add Infomation AboutPrakash Narayan Dixit
लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
6 MB
कुल पष्ठ :
186
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)(५ )भगवत्त भक्त भवसिष्ठ कौ, कीरति कहत सुजान हं 1
हरि प्रसाद रस स्वाद के भक्त इते परमान हं 11१इसके आवार पर नतो नाभादास का भी प्रकार परिचय ही मिल
पाता है भौर न काव्य-कौदाल का ठीक-टीक अनुमान ही लगाया जा सकता हैँ ।
सरोज! के पर्चात् नाभादास जी के सम्बंध में सविस्तार परिचय और विवरण
देने का कार्य मिश्रवंधु विनोद' में सम्पन्न हुआ ।* विद्वान लेखकों ने लगभग चार
पृष्ठो में नाभादास ओर् प्रियादास का परिचय दिवा है । मिश्रवंवु पहले इतिहास-
कार हैं जिन्होंने नाभादास के उपेक्षित व्यक्तित्व के प्रति इतना व्यान दिया है ।
'सिथ्वंधु निम्नलिखित विपयों पर प्रकाग डालते हैं :
(क) नाभादास के गुरु का नाम
(ख) नाभादास का समय
(ग) भक्तमाठ कौ रचना-तिथि
घ) नाभादास की जाति
) नाभादास का निवन काल
) नाभादास एक भक्त के रूप में
ज) नाभादास एक कवि के रूप में
(ज्ञ) नाभादास के अन्य ग्रन्यों का परिचय
(ट) नामादास का महत्त्व4९&।|(
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(4उपलिखित इन विपयों का अव्ययन करने से यह् स्पष्ट हो जाता ह कि नाभा-
-दास के सम्बंध में मिथ्वंघु ने जो कुछ सामग्री दी है वह हिन्दी में सर्वया मौलिक
आर नवीन है । इतने विस्तार के साथ नामादास का आलोचनात्पक अध्ययन
हिन्दी मेँ सम्भवतः इससे पूर्व नहीं हुआ था । नाभादास के व्यक्तित्व और रचनाओं
के सम्बंध में 'मिश्नवंधु विनोद से हमें पर्याप्त सूचनाएँ प्राप्त हो जाती हैं । सबसे
-ड़ी वात यह् हँ कि विनोद के वाद में लिखे जाने वाले इतिहासों में इन्हीं वातों
(नाभादास के गुरु का नाम, समय, भक्तमाल की रचना-तिथि, नाभादास की
जाति, नाभादास के ग्रन्थ आदि) की पुनरावृत्ति हुई है ।
'मिश्रवंु विनोद' के अनन्तर गुक्लछ जी लिखित “हिन्दी साहित्य का१. शिवसिह सेंगर : सरोज, सातवाँ संस्करण, पृ० १७१
२. मसिश्रवन्चु विनोद, चतुर्य संस्करण, पृ० ३५७-६१
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