अनुत्त्रोपपातिक दसासुत्रम | Anuttaroppatik Dashsutram

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Anuttaroppatik Dashsutram by खजानचीराम जैन - Khajanchiram Jain

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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(६) श्रीमान्‌ नारा तजेगाह जा इसी धर्मकार्य म ही अपने हदय फी परि्नारता का परिचय नी दिया भपितु आपके यशसी हाथो से अनेफ धर्मकार्यं मम्पन् दहो चुके हे । सात सहायको का परिचय मउपर दे चुका हूं । आठनें स्थान पर जय भेरी सपनी ही वारी जाती ह । अपने मम्बन्धमे प्न क्या रियंन मर्र जन ममान रा एक तुच्छ दाम ओर हम पिते कार्यं म माहाग्य देने चाले उपरोक्त महापुस्पो गा ऋणी हैं, जिन्होंने मेरे इस उद्देश्य में मेरी हर प्रकार से सद्दायता थी है । मेरे मन मे ऐसी घास्माठा के उद्घाटन - तेजेशाह जी हैं। जापको रागलपिण्डी जैन जाति मे पिप सम्मान श्राप है। आप वहा के प्रसिद्ध येसंग है । इसके अतिरिक्त आपकी सराफी और यजाजी की दुकान भी चरती ई । जप मुरय व्यापारी ह । आपि बडे ही सुशील ओर कोमल प्रकृति है । गम्भीर आर परिचारी ह । परम उत्माही और शाखप्रेमी द । दान मे उडी रुचि है । आपका पुण्योदय देखिए, मन्तान भी उदी योग्य सौर = पितृभक्त ६ । ऽपरिरिखित रायल ,.. पिएडी-नियासी ढोनो मजने ने केयर श्य शाखमाला वा सगी नर और परब खज़ानचीराम जैन मनशिद् प्रापाइटर पश्न्न्याट्रारार सइमणराम जैन पम्तक जिसता सास




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