प्रमुख देशों की शासन प्रणालियाँ | Pramukh Deshon Ki Shasan Pranaliyan

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Pramukh Deshon Ki Shasan Pranaliyan by चन्द्रभानु गुप्त - Chandrabhanu Gupt

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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ददन का पारस्परिक विरोध--दूसरा सदन-सीनेट के सदस्यों की योग्यवाये--सीनेट के सदस्यों को श्राप सुविधायें--समापति-सीनेट की शक्तियां -- सीनेट सबसे शक्तिशाली दूसरा सदन ह-सीनेट अपनी का्ये- प्रणाली स्वयं निर्धारिति करती दे--कांग्रेस का प्रसाव--संघ कार्यपालिका-- मेसीडेंट पद के लिये योग्यताय--+प्रेसीडेंट के पद की दधि -निवचन से होता हूँ---म्रेसीछेंट निर्वाचिकों का चुवाव--प्रेसोइंट रर उप-प्रेंसी- 2 की निर्वाचन-रापथ--प्रेपीडंट का बेतन--श्रेसीइट दस्यन्त , लोकप्रिय व्यक्ति होता हैं । सबसे शक्तिशाली शासनाध्यस-+विधाधिनी शक्तियां ४ ५ ८¶ £ प्रेसीडट कृ! प्रतिषधात्सक अवेकार्‌ {४९६0 (तकल पनपन्ान्सकः य्रधिक्छरं { ५20 70 टाः } का सहस्व --काष्न्ारि् एन्छिया-- स्वविवेकी शक्तियां [50८६0 8158 0 ्टा8 ;--परपोडट पर अभियोग--श्रेसीडट की सन्विपरिपदू सचिव प्रेसीडेंट के सातहत हैं संघ बा न्यायपालिका सर्वोच्च न्यायालय--न्यायाघीशों की. वियुक्तिन-सवोच्च न्यायालय का धिकार कै्र--परसिमिक्त यथि्ार-कै-सथिश्रात की व्या८या--सरवो्च न्यायालय की. बनावट--अआसणशील न्यायालय जिला स्यायालय--अन्य न्यायालय--शायन विधान का संशवननसंयुक्त राज्य मे राजनेत्तिक दल--पाठ्य पुस्तदेः-- १७. स युक्त राज्य असेरिका सें उपराज्यों की सरकार । ३८० उपराव्य की उत्पत्ति व विद उपरास्याके सम्बन्धे छदं प्रमुख बात--उपराज्य शासन-विघान-- ४४ उपराज्य शासन विधान--उप- राज्यां के शासन-विधानोंकी सामान्य विशेषताय--उपराज्य विधानसरडल- विधान सण्डल का निर्वाचन--विधानसण्ड्ल की अवधि--व्यवस्थापक मख्डल का कायं संविधान संशोधन--ुउपराज्यों के विधान सर्ब्ल की शच्तिर्या--उपराञ्यःं कौ कायपाद्धिका--गवनेर--गवनर की शन्िया-- दूसरे पदाधिकाश--उपराञ्य स्यायपालिका-- स्थानीय शामन विभिन्न स्थानीय संस्थाय--प्रत्यक्ष लॉकतन्त्र- अधिनियस उपक्रम { 111111- 21ए€)-ए लोक निणय - अधिनियस प्रकरण व लोक निर्णय {{711४128- 19९ 870 रिटाटाटा1 एप )नदेस प्रणाली के दोपन-प्रत्याहरण { ९८811 } पाल्य पुस्यक -- १८, स्विटजरलड 01 ९४ न २६३. शासन-वधान का इत्तेहास---परिदिय---निवासौ---देवानिक इतिह वच युग---{३; प्राचीन सुंष---{२) देस्वेटि जातन्त्र---{३) के नेपोलियन काल (४) सन्‌ १८१९१८४८ का संव-शान्नन {६}




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