बलिया में क्रांति और दमन | Baliya Men Kranti Aur Daman.

55/10 Ratings. 1 Review(s) अपना Review जोड़ें |
Baliya Men Kranti Aur Daman. by देवनाथ उपाध्याय - Devnath Upadhyay

लेखक के बारे में अधिक जानकारी :

No Information available about देवनाथ उपाध्याय - Devnath Upadhyay

Add Infomation AboutDevnath Upadhyay

पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

(Click to expand)
क्रांति की एप्ठ सुंमिं १९४९ के प्रारंभ में द्वितीय महासमर बड़े जोरों पर चल रहा था । रूस में जर्मनी की सेनायें बढ़ी चली १८४२ का पूर्वाद् जाती थीं | झक्तरीकन मोर्चा पर मित्र सेनाओं के प्रति दिनि नीचा देखना पडता था । ग्रशान्त महासागर मे जापान का वोलवाज्ञा था । वषं के प्रारम्भ से ही भारत पर जापानी आक्रमण की आशङ्का होने लगी थी । वर्ष के प्रथम दिवस के अवसर पर भारत के प्रधान सेनापति ने संदेश देते हये कहा--भारत मेँ सन १९४१ ने महीयुद्ध के हमार निकट ला दिया है जिससे हमारे उपर नये खतरे और नई जिम्दारियां आ गई' हैं* । युद्ध की विभीपिका से भारत त्रस्त दो उठा था । जापानी आक्रमण से अपने धन-जन की रक्षा करने की लालसा सव के दिल में थी किन्तु त्रिटिश सरकार भारत को आत्मरक्ता के लिये न तो जिम्मेदारी देने को तैयार थी चौर न भारतीयों के पास निजी शसखाख थे जिनसे सैन्य वल का सुकावला किया जाता । त्रिटिश सरकार दृद थी] वह भारत की- रक्षा तथा शासन सम्बन्धी मामलों में कोई व्यापक परिवर्तन करने को तैयार न थी । है ९16 70 अपर्तीध, 1941 45 एष्ट पल क्थ्यः द्वाः 10 पऽ वयत्‌ 185 [7०पटा६ फल्ला वदण्ूट्ड धणे 165]00057)0111965.




User Reviews

No Reviews | Add Yours...

Only Logged in Users Can Post Reviews, Login Now