बलिया में क्रांति और दमन | Baliya Men Kranti Aur Daman.

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Book Image : बलिया में क्रांति और दमन  - Baliya Men Kranti Aur Daman.
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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क्रांति की एप्ठ सुंमिं१९४९ के प्रारंभ में द्वितीय महासमर बड़े जोरों पर चलरहा था । रूस में जर्मनी की सेनायें बढ़ी चली१८४२ का पूर्वाद् जाती थीं | झक्तरीकन मोर्चा पर मित्र सेनाओंके प्रति दिनि नीचा देखना पडता था ।ग्रशान्त महासागर मे जापान का वोलवाज्ञा था । वषं केप्रारम्भ से ही भारत पर जापानी आक्रमण की आशङ्काहोने लगी थी । वर्ष के प्रथम दिवस के अवसर पर भारत के प्रधानसेनापति ने संदेश देते हये कहा--भारत मेँ सन १९४१ ने महीयुद्धके हमार निकट ला दिया है जिससे हमारे उपर नये खतरे और नई जिम्दारियां आ गई' हैं* ।युद्ध की विभीपिका से भारत त्रस्त दो उठा था । जापानी आक्रमण से अपने धन-जन की रक्षा करने की लालसा सव के दिल में थी किन्तु त्रिटिश सरकार भारत को आत्मरक्ता के लिये न तो जिम्मेदारी देने को तैयार थी चौर न भारतीयों के पास निजी शसखाख थे जिनसे सैन्य वल का सुकावला किया जाता । त्रिटिश सरकार दृद थी] वह भारत की- रक्षा तथा शासन सम्बन्धी मामलों में कोई व्यापक परिवर्तन करने को तैयार न थी ।है ९16 70 अपर्तीध, 1941 45 एष्ट पल क्थ्यः द्वाः 10 पऽ वयत्‌ 185 [7०पटा६ फल्ला वदण्ूट्ड धणे 165]00057)0111965.




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