भारतीय अर्थशास्त्र | Bhartiya Arthshastra

Bhartiya Arthsastra by भगवानदास केला - Bhagwandas Kela

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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( न >) विक्रय सम्बन्धी ब्यहुविधाएँ--दलालों की श्धिकता-पदार्थों के माव-ताव करने मे विवय में-दाट-व्यवस्या-साल का विदारनना व्यापारिक सफलता श्रौर ईमानदारो--युद्धं श्रौर देशी व्यापार । एष्ट २५१२६१५ बोसवां अध्याय विदेशी व्यापार प्राकपन-- भारतवर्ष का प्राचीन व्यापार--व्यापार का परि- माण--व्यापार का स्व॒रूप--शझ्ायात की वस्तुएँ -रूई श्रौर सती माल -रेशमी शरोर ऊनी माल-लंदिश्रौर फौलाद का सामान--चीनी --मिष्ठौ का तेल श्रौर पेरेल--कागक्न~- श्राया की श्रन्य वध्ठर्प-- हमारे निर्यात के पदार्थ; जट श्रौर उमका षामान--रूई श्रौर सूती माल--खाद्य पदा्थं--तेलइन-- चाय-- चमा श्रौर खाल--ऊन-- घातु--ब्यापार की बाकी--सीमा की राह से ब्यापार--श्रायात-निर्पात सम्बन्धी विरोप वव्य--विदेशं वदिष्कार श्रौर विरवर्थधुत्व--विदेशो में मारतवर्ष का. गौरव--युद्ध श्रौर विदेशी व्यापार--य॒दधोत्तर ब्यापार | पृष्ट २६५-- २८२ इकीय्वाँ अध्याय विदेशों व्यापार की नीति संरचण नौति--मुक्तद्वार-व्यापार-नौति--इन नीतियों का ब्यव- ४ हार-मार्त को ज्यापार नोति--निरयोतनकर--साधाज्यास्तगंत रिया- यत--खाप्नार्य सम्बन्धी व्यापार का स्वन्प--खाघ्नाज्यान्तर्गत रिवायत से भारत क हानि-च्यापारिक खममतते--व्यापार नीति श्रौरः श्रन्त- राष्ट्रीयता । ष्ठ दे८४--र६र्‌




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