स्वातंत्र्योत्तर हिन्दी कथा-साहित्य और ग्राम-जीवन | Swatantrottar Hindi Katha Sahitya Aur Gram Jeevan

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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विषय सुचो प्रस्तावना पृष्ठ १७-६१ स्वात्योतर शब्द का बर्य--स्वातंत्योतर कथा-साहित्य का भिन्नत्व-- आलोच्य कालावयि का महत्व -कथा-साहि्य मे अभूतपूवं क्रन्ति-नयी कहानी आन्दोलन--कहानी; बेदद्रीय साहित्यिक विषा-नयी कहानी का मारम्‌ ग्राम जीवन से-प्राम-जीवन कौ उपेक्षा-नवत्तेवन ओर प्राम-जीजन का यथाथं-- ग्राम-जोवन के कथाकार-~ग्राम-कथा और आधुनिकता--पत्र-पन्तिकाओ का सर्वेक्षण--नवीनतम युवा लेखन--ग्राम-जीवन के प्रति उपेक्षा ओर विरक्ति के कारण प्रथम प्रध्याय स्वातेऽपोतर भारतीप ग्राम-जीवन पृष्ठ ६३-११३ स्वतेत्रतापूवं ग्राम-जीवन--स्वातंश्योतर बदलाव : पंचवर्षीय योजनाये-- सामुदायिक विकास योजना-पंचायत राज--सहकारी सनिति कुटीर उद्योग और भूमि सुघार--व्यापक, मामून किन्तुं प्रमावहीन परिवतन-- गव कौ हीनं स्विति, गौयोगीकरण ओर अकाल--हुरी क्रान्ति--ग्रामोत्थान की नयी दिणा सौर घना कुहरा । द्वितीय प्रध्याय स्थातंत्योतर्‌ फया-स)हित्य मे प्राम-जोवन पृष्ठ ११७-१७७ (कृतियो भौर कृत्तिकारों का सर्वे्षण) (९) वैविध्य भौर काल-दृष्टि। (२) वर्गीकरण । श--सामान्य कथा-साहिस्य ०. « क. दैणकाल निरपेक्ष सनातन भूत्य ख, प्ेमघन्दे कौ परम्परा के परिपेक््य




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