हीरे की बातें | Hire Ki Baten

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Hire Ki Baten  by प्रेमनारायण टंडन - Premnarayan tandan

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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तल निकुंज के कुसुमित सुमनों की सुगंध से मस्त हो जब लताओं से अठखेलियाँ कर रही थो तमो ज्ञाति की खोज मे पागल कवि उसके मधुर सपन से चौक पड़ा । जिज्ञासा भरी दृष्टि से विने क्रीड़ा में रत वायु की ओर देखा; जैसे वह जानना चाहता था कि अखिल विदव के कोने-कोने में रमने वाली यह वायु तो शांति का ठौर जानती ही होगी तमी एक झोंका आया । वायु ने मानो उत्तर दिया--संभी दिशाओं में, सभी स्थलों मे इतनी तीव्र गति सेम शांति का निवास ही खोजती फिरती हूँ; परंतु कहीं भी तो शांति नहीं भिलौ । करि बांति की आशा से ही तो मैं तुम्हारे पास आयी थी । व! 4 ८ ५९ कवि उत्तर सुनकर ठगा-सा रह गया ।




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