बेलून बिहारे | Belun Bihare

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Belun Bihare by शिवसहाय चतुर्वेदी - Shivsahaya Chaturvedi

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पंडित शिव सही चतुर्वेदी का जन्म मध्य प्रदेश के सागर जिले के देवरी नामक गांव में हुआ था | इन्होने कई पुस्तकें लिखीं किन्तु समय के साथ साथ उनमें से कुछ विलुप्त हो गयीं | ये एक अमीर घराने से थे और बचपन से ही कला में रूचि रखते थे |
इनके वंशज आज जबलपुर जिले में रहते हैं और शायद ये भी नहीं जानते कि उनके दादाजी एक अच्छे और प्रसिद्ध लेखक थे | इनके पौत्र डॉ. प्रियांक चतुर्वेदी HIG 5 शिवनगर दमोहनाका जबलपुर में निवास करते हैं |

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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दूसरा परिच्छेद । र ~ ~--~~~-~~~~~-~-~~-~-~-~-~~-^-^~~^~~~^~-~-ˆ~ ~~~ चाहता है! उ; कसी दुराकांचा है ! कंखा पागलपन इ! झूगल पचीकों सी परास्त करना चाहता है ! उसे इस बैठव कार्यसे रोकना चाहिये । सुफ़े जान पड़ता है कि, यदि में उसे बाधा न दूँ, तो व एक दिन चन्द्रलोकको यात्रा करेगा! केनेडी अधिक विलग्ब सन नहीं कर सका, वद सिचव लिये चिन्तित होकर उसो राचिको लन्द्नक्ते लिये रवानाष्टो गया । सिरे जिख समय फगुखन अपने निजन कमरेसें चिन्ताममन डारहाघा, उसो समय केनेडोने जाकर टरवाज्ञा ख॒टखटाया । किवाड खोलतेरी फगु सनने विस्सयके साथ कहा,“ डिक ड ? फगुखन्‌ मसिव्को क्‌ कहकर दो पुकांरता था। केनेडोने सिरसे टोपौडउतार कर कदा, _ “हाँ, में हो हा ।” “न तो शिकार का अवसर है, शिकार छोड़कर लन्दन केसे आये ?” “एक पागल आादसीकों ठण्डा करनेके लिये आया हा ।” “पागल १ पागल कौन डे? केनेडीने “उलो टेलिग्राफः क एक अंशको फशु सनके सामने रखकर कद्ा,- “यद्ध बात जो इसमे लिखो ₹ै व्या सच हे? “बस, केवल इसो बातके लिये इतने व्यस्त होरहे हो ? श्रच्छा, खडे क्यों हो, वेठ जाग्र न ।” म्‌ नोक




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