श्रीमदयानंद प्रकाश | Srimadyanand Prakash

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Srimadyanand Prakash by स्वामी सत्यानन्द जी महाराज - Swami Satyanand Ji Maharaj

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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छठ भोग्प पदों की महाएंता दिनोद्िन धदतों थी चलो जा रही £ैं, निस निसारियों का कातर क्रलन दिराम-विध्यमपिददीन होने लग गया दे। श्री स्वामौगी यह भी जानयैये कि मारत-मुमि रान-्यर्मा दै, सुझझ्ा, सुला दै । उमर नहीं, किन्दू उस्दंरा घौर सस्ययालिनी है । इस पर पादार- योगय मामा धान्य उव दोन ई! इ पर सुस्वादु पलो श एटि भी नही ६। भोजन, चाम्दुदूम पौर प्यवदार के योग्य सव यस्तु यहां ष्पद होती ६ । चो फिर माना षसुन्परा द्पनौ सन्तान फा लाचन-पालन कयो नटो कर सकती १ सरे शादते छके-वाने भूः के म इसकी गोद में देटे पिल्लप-विलख कर भाद-चाट्‌ न्‌ ¶्योरोरदेट१ छप केभरभोष्ठा उसर महपिंने श्रष्द रह समम लिया था । उतकी दिव्य दृशि पे नित्य फे धकाल के कारणों का दुरे रहना सवया ग्रमम्भ्व या | वे तानते थे कि भूमि की उप्र में मेद नहीं पदा, किन्तु हु डे पूद्धि दो गई दो सो कोई चाश्रयं नहीं । फिर थी यहां भू र चौर दुर्भि ६, मो इसका कारण शिदपकला षा भारी अभाव है। आवश्यकोय ब्यवदार की परतुय यहाँ निर्मित गर्दी होती । विदेशी चस्तुदों को भरमार से यहां के कारों परिश्रम निरुस्मे दो रे हैं । उनके पाम झाजीडिका कर कोई उपाय नहीं रद्द । पदले साधारण परिष्टियठि के मनुष्य से लेकर मद्दाराजों और राजे भ्वरों तक इसी देर के यने वस्तरों से वेश-विन्याम करते थे, यहाँ ऊँ रान-जटित चौर मणि-सुक्-एवित श्रामृपणों से विमूपित होते । उमके श्रााश-मेदो मयम दसो दे के हतकम्मी दिशवकम्माधिो के दवारा बनाये जाति । उनकी सुसलित करने के लिए भारत को चिश्रशाजाधों के पिशारों ही से थदूमुत चिप्र प्रा हो जति । परन्तु शान सथ कदु पिपरी हो गया है । महारा, बूम वक्त को भो नि, श्रपने भाप को भ्याख्याने-मवन की सुलों शको से पार कर देनेमें हो अपने दुर-दित की सम्पदं मसा महं मानने थे । वे परम कर्म-योगी थे, इस कारण क्रियास्सक कमें करना थाइते थे । उनके जीवन के श्रन्तिम दर्पौ तं, उनके धर्म॑-प्रचार प्रौर समाज-मुधार झादि उदास उश्यों में, भारंतबंध में रिदपकलज्ा का विस्तारित करना मी सम्मितित दो गया था 1 वे इसके लिए पूं भ्रयटन कर्‌ रद थे । उन्दोंने पते पश्चिमी शिष्य 'वीस महाशय म क्षिसा था ङि शाप भारतवासियों को शिदपनकला सिखाने का प्रबंध कीनिए 1 मदारान के पग्र के उसर में जर्मन देश निवासी शोमानू जी,ए. बीस ने




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