अध्यात्म पञ्च संग्रह | Adhyatam Panch Sangarh

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Adhyatam Panch Sangarh by शिवरामदास उदासीन चक्रवर्ती - Shivramdas Chakravarti

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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ष केचि अ उके:-फसे रेट मे डक से: ये इसे: हद 3 53- उस: इसे: उसे ज ज्जे जयेद कपि -92-9ये ऊक कपिकके जपे अर झट ६ [परमात्सपुराण) रु अगे शुद्रसरूप गण को बतावे है। अपनी फ्ययिवृत्ति करे एक एक गुण सब गुण की मेवा कर हे, ताको व्णन-सूक्ष्मगुण के अनतपययि ज्ञान सष््न दरसन सृष्म वीर्यं सूक्ष्म सत्ता सुधष्म सूक्ष्म गुण अपनी सूक्ष्मपयाय न देता ती वे सूक्ष्म न हेति । तब स्थूल भय इन्द्रिय ग्राह्य भय जइता पवेत, तति सूदम गुण अपनी सुक्ष्मपर्याय दे सत्र गुण का स्थिति भाव सुद्ध यथावत कार्य संवारे है । यतत सुक्ष्मगुण की. सेवावृत्ति सधी । तातैं सुक्ष्मगुण झूद ऐसा नाम पाया । सत्तागुण के अनतः पर्याय सत्ता है लक्षण पर्याय सवक दयि तत्र सब गुण अस्तिभाव रूप भये अपनी आस्तिमाव पर्याय दे उनके आग्तिभाव राखन के कार्य सवारे । तात सत्ता उनके कायै सवारने ते उनकी सेवावृत्ति भई तत्र सत्ता को झूद ऐसा नाम भया । या प्रकार सव गुण सद्र भये। त ८ = _ जूस आगे च्यारि आश्रम मद लिखिये है। सव गुण बह्म आचरण कीये है, ताति बह्मचाशी दँ । ज्ञान बह्म एक है ताते ज्ञान वरह्य ९5-29-55 -25- <> 25-25-39 2.5: € ८०-६५-९4 - ०८-०८-८० २८८5 =< ०२-०८-5० ० ०25 < कि अक -5 प्-5 व ७१ | 1 । -फुसे करे हे के कफ: फये ऊपे ७णे9क -99-9 9७ छक 6 ७5 -७ये ञे -कर-कजेभ्य




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