भट्टारक चर्चा | Bhattarak Charcha

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Bhattarak Charcha by दिगम्बर जैन - Digambar Jain

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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( ९३) कुछ विशेषताएं हुई हैं सको दम पाठकों के सामने सत्य २ रखते है जिससे पाठक मल भाँति अनुमान क्षगा सकते हैं । इनके प्रति बतसान में लोगो की केंसी भावना हे जो पर्चे निकले थे उनकी नक्रल देरहे हैं ! | श्री ॥ शुभ काममें आापत्तिसे ठष्गे मत गे चत्र फाड़ना महा पाप है । च्यपील ! श्री नरमिंह पुरा दि८ जैन युवक संघ भीडर १ १) भादयों ऑस्य खोलो, जमाने की रफ्तार देष्वो गादौ कमाई के पसे का दुरूपयोग मत करों ? : २) जत्र तक भट्टारक जी श्रपनी निज सम्पत्ति नरसिद पुरा दिगम्बर पंचों के नाम से रजिस्ट्री न करादेवे 'और भामद- खच का हिसाव न रक्ये तब तक रोकढ़ मेंस बिल्कुल मत दो ! मत दो | मत दो (२) जब तक यह काय न हों श्यौर पैसे दिये जोये तो पश्च मट्टा- रव फण्डके नामस श्रलग जमा कर। १ %) भदो जागो देश में कया हो रह। है यह समय ऐशो झाराम में सोने का नहीं हैं, देश देश में चहूँ ञोर लड़ाई होरही है । अकाल पड़ रहा है, दीन दु'स्वियों का होश ठिकाने नद्दी है और भी कई देवी आपत्तिएँं धर्म व जाति पर आती




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