भट्टारक चर्चा | Bhattarak Charcha

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
655 KB
कुल पष्ठ :
38
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)( ९३)कुछ विशेषताएं हुई हैं सको दम पाठकों के सामने सत्य २ रखते
है जिससे पाठक मल भाँति अनुमान क्षगा सकते हैं । इनके प्रति
बतसान में लोगो की केंसी भावना हे जो पर्चे निकले थे उनकी
नक्रल देरहे हैं !| श्री ॥
शुभ काममें आापत्तिसे ठष्गेमत गे चत्र फाड़ना महा पाप है ।
च्यपील !श्री नरमिंह पुरा दि८ जैन युवक संघ भीडर१ १) भादयों ऑस्य खोलो, जमाने की रफ्तार देष्वो गादौ कमाई
के पसे का दुरूपयोग मत करों ?: २) जत्र तक भट्टारक जी श्रपनी निज सम्पत्ति नरसिद पुरादिगम्बर पंचों के नाम से रजिस्ट्री न करादेवे 'और भामद-
खच का हिसाव न रक्ये तब तक रोकढ़ मेंस बिल्कुल
मत दो ! मत दो | मत दो(२) जब तक यह काय न हों श्यौर पैसे दिये जोये तो पश्च मट्टा-
रव फण्डके नामस श्रलग जमा कर।१ %) भदो जागो देश में कया हो रह। है यह समय ऐशो झाराम
में सोने का नहीं हैं, देश देश में चहूँ ञोर लड़ाई होरही है ।
अकाल पड़ रहा है, दीन दु'स्वियों का होश ठिकाने नद्दी है
और भी कई देवी आपत्तिएँं धर्म व जाति पर आती
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